Wednesday, 6 July 2011

भारत के मन्दिरों में कुबेर का खजाना


भारत शताब्दियों से सोने की चिड़िया कहा जाता रहा है। सोने की चिड़िया का आकर्षण, अरब लुटेरों, मुगलों, अंग्रेजों, फ्रांसीसियों, पुर्तगालियों आदि को भारत की धरती पर लाया और उन्होंने जी भर कर लूटा खसोटा, बेशुमार सोना, चांदी, हीरा, पन्ना, पुखराज तथा बहुमूल्य आभूषण जवाहरात अपने देशों को भेजा। जीभर कर रंग रेलियां मनाई। हमें गुलाम बनाया। सोमनाथ, मथुरा, काशी तथा शिव के 12 धामों, मा काली, वैष्णवी, चामुंडा, कर्नाटक के बेलूर में स्थित शिव एवं विष्णु के मंदिरों से बेसुमार दौलत लूटा। दक्षिण के सैकड़ों मन्दिरों से बेशुमार दौलत लूटा मन्दिरों को क्षति ग्रस्त किया। इसके लिए  ईश्वर, समय और इतिहास उन्हें कभी माफ नहीं करेगा।
आज भी आजादी के बाद बहुत सारे मन्दिरों, मठ, देवालयों में इतना सोना, चांदी, जवाहरात, रुपया तहखानों में भरा है जो लगभग 5 लाख हजार करोड़ में आंकी जा सकती है। उससे 120 करोड़ भारतीयों की गरीबी दूर हो सकती है और देश खुशहाल हो सकता है। सरकार अपनी पंच वर्षीय योजनाएं विदेशी कर्ज के बिना चला सकती हैं।
हाल ही में साईं बाबा ट्रस्ट, तिरुपतिनाथ, विष्णुजी मन्दिर केरल तथा अन्य मन्दिरों, ट्रस्टों से निकली संपत्ति लगभग 2-3 लाख हजार करोड़ में कूती जा रही है। और भी इसके अतिरिक्त काफी सारा धन गुप्त रूप से तहखानों में बन्द पड़ा है। तथा विदेशी बैंकों में काला धन जमा है। उससे 120 करोड़ भारतीयों की गरीबी दूर हो सकती है। वे धनवान बन सकते हैं। सरकार अपनी पंचवर्षीय योजनाएं विदेशी कर्ज के बिना अच्छे से चला सकती है। हाल ही में साईं बाबा ट्रस्ट, बाबाजी तिरुपति मंदिर, विष्णुजी मंदिर, केरल में पद्मनाभ मंदिर में लाखों हजार करोड़ रुपये के सोना चांदी जवाहरात, हीरा पन्ना आदि भरा पड़ा है। इन मंदिरों, ट्रस्टों से निकली संपत्ति लगभग दो-तीन लाख हजार करोड़ में आंकी जा रही है।

यह सब देखकर प्रत्येक भारतीय को गर्व के साथ कहना होगा- भारत आज भी सोने की चिड़िया है। इसके लिए जरूरी है कि राज्य सरकारें, केन्द्रीय सरकार तथा मठों के अध्यक्ष, पुजारी लोक कल्याण के प्रति अधिक जागरूक हों और सच्चे मन से मानव सेवा को अपना धर्म समझें।

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