Saturday, 21 January 2012

स्वदेश भारती - संस्मरण

वर्ष 1977 में संजय साढ़े तीन और आनन्द सवा दो के थे। गंगा सागर जाने का विचार सहज स्वतः और अकस्मात दिल-दिमाग को आंदोलित करने लगा। मैं आफिस के लिए तैयार हो रहा था तभी यह निर्णय लिया-क्यों न आज और अभी ही गंगा सागर जाया जाए। उत्तराजी (पत्नी) किचेन में कुछ बना रही थीं। मैने कहा- देवी, चलो गंगासागर चलते हैं और अपने, उत्तराजी के बच्चों के दो चार कपड़े झोले में डाला और बच्चों को साथ लेकर, घर में ताला लगाया राशबिहारी मोड़ से टैक्सी पकड़कर इस्पलानेड बस स्टैंड पहुंचे। काकद्वीप की बस में बैठ गए। शाम 5 बजे काकद्वीप पहुंचे तो देखा लाखों की भीड़, मीलों तक कतारबद्ध लोग। मैंने संजय को गोद में लिया, उत्तराजी ने आनन्द को। मैने उत्तराजी से कहा-मेरे पीछे-पीछे चलती रहो। खो मत जाना। भीड़ के बीच हम गंगा के कगार तक किसी तरह पहुंचे। देखा यहां के हालत विचित्र हैं। लाइनें लगी हुई थी। सोचा यदि लाइन में लगे तो रात भर हम लाइन में लगे ही रहेंगे। कुछ करना होगा। नीचे 15 फूट खाईं थी, उसके बाद गंगा का बहाव। मैने उत्तराजी से कहा मुझे नीचे कूदना है और एक-एक करके बच्चों को तुम फेंक दो मैं उन्हें सहेज लूंगा। दोनों बच्चों को उत्तराजी ने इस तरह फेंका मुझे लगा जैसे टूटे फलों को थाम रहा हूं। अब उत्तराजी कैसे नीचे उतरें। मैने उनका ढांढस बंधाया। साहस करो नीचे आओ। बांध से सरको, डरो नहीं मैं हूं ना। संभाल लूंगा। वे भी नीचे सरकते हुए आ गईं। बड़ी मुश्किल से हम चारों भीड़ भरी नाव में चढ़ गए और गंगा पार कर सागर द्वीप में जब पहूंचे तो देखा उस पार बसों पर बेहद कष्टप्रद तरीके से लोग चढ़ रहे हैं। हम चारों भी बड़ी कठिनाई से बस में चढ़े और गंगा सागर तट आधे घंटे में पहुंच गए। देखा चार-पांच लाख की भीड़ में कहीं भी ठहरने की जगह नहीं थी। भारत सेवाश्रम संघ के कैम्प में जाकर बड़े महंतजी को मैने अपना परिचय दिया। वे पहले तो प्रसन्न हो गए। फिर मौन होकर सोचते रहे। छोटे-छोटे थके भूखे दोनों बच्चों, उत्तराजी का और फिर मेरा सूखा चेहरा देखकर बोले -ऐसा कीजिए आप मेन कैम्प में जहां भी जगह पाएं जाकर विश्राम करें। मैने उन्हें धन्यवाद दिया। बच्चों की उंगली थामें कैम्प में जाकर एक कोने डेरा जमा लिया। उस समय रात के 10 बज गए थे। बच्चे और उत्तराजी बेहद भूखे थे। दिन भर कुछ खाया नहीं था। मैं उन्हें हिदायत देकर बाहर निकला। एक जगह पूरियां बन रही थी वहां से पुरी सब्जी लिए आकर हम सब खाना खाया। बच्चे नींद में थें। एकाध पुरी खाकर सो गए। मैं अपने साथ दो-तीन उन्नी चादर ले गया था। बिचाली (पैरा) नीचा बिछा था। उस पर चादर बिछाकर बच्चों को सुला दिया। फिर हम दोनों क्या करते। जगह थी नहीं। भीड़ बढ़ती जा रही थी। हम दोनों बच्चों की सुरक्षा में उन्हें घेरकर बैठे रहे। 3.30 बजे मकर संक्रांति-सागर स्नान का मुहुर्त था। हमने बच्चों को जगाकर तैयार किया। उन्हें निदाशा ही लेकर सागर स्नान के लिए चल पड़ा। लाखों की भींड़ थी। ऐसे में उत्तराजी ने कहा-देखिए अभी तो 3.30 बजे हैं। इतनी रात में बच्चों को स्नान कराना ठीक नहीं। चलिए वापस कैम्प में चलते हैं। पांच-छह बजे उठकर आ जाएंगे। उनका सुझाव मानकर हम दोबारा कैम्प में लौट आए। उसी जगह बैठ गए जहां पहले डेरा जमाए थे। झोले से सरसों का तेल निकालकर बच्चों की मालिश की। घंटे भर में तैयार होकर गंगा स्नान के लिए पुनः चल दिए। बेशुमार भीड़ थी। हम उस भीड़ की बीच से निकलते हुए सागर-तट पर पहुंच गए। सागर को देखकर मन एक अलौकिक प्रकाश से भर गया। आनन्द विभोर हो उठा। तब तक सूर्य की सतरंगी लालिमा पूर्व क्षीतिज पर रंगोली खेल रही थी। नीचे सागर में धीरे-धीरे लहरें चल रही थीं। असंख्य नर-नारी जय शिव-शंभु, ओम् नमः शिवाय की जय बोलते हुए समुद्र बोलते हुए समुद्र जल में स्नान कर रहे थे। देवों-पीतरों को जलांजली, तर्पण दे रहे थे। उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर रहे थे। हम चारों उनके बीच से होते हुए आगे बढ़ गए। कुछ दूर पर एक नाव खड़ी थी। नाव वाले से कहा-भैया तुम्हारे नाव पर हम कपड़े रखना चाहते हैं। थोड़ा नहाने में मदद करो। उसने बंगला में कहा - ठीक आछे, किन्तु तड़ातड़ी कोरते होबे।  (ठीक है लेकिन जल्दी करना होगा)। मैने संजय को सीने से चिपकाकर डूबकी लगाई और लगातार ठंडे पानी में कई बार डूबकी लगाई। संजय ठंड से कांपने लगा। उसी तरह आनन्द को भी नहलाया। दोनों बच्चे कांप रहे थे।  उन्हें कपड़े पहनाकर पूजांजलि देकर पंडित से तीलक चंदन लगवाकर महासागर को पुनः प्रणाम किया और घुटना भर पानी में चलकर पूजा-अर्चना हेतु कपिलमुनी मंदिर के बाहर असंख्य जनसमूह के बीच जाकर फंस गए। भीड़ की लहर ऐसी थी कि वे अपने आस-पास के लोगों को मनुष्य नहीं समझते थे। ठेला-ठेली करती हुई मंदिर की ओर जाने की जानलेवा कोशिश कर रही थी। उनके हुड़दंग में संजय गिर गया। उसे बचाने के लिए उत्तराजी नीचे झूककर उसे उठाना चाही तो भीड़ के बेतहाशा सैलाब में वे भी गिर गईं। भीड़ उन दोनों को रौंदती हुई आगे बढ़ रही थी, मैने देखा कि पत्नी और बच्चे गए। अपने आंखों के सामने असहाय पत्नी और बच्चे को देखकर अचानक ही मेरे अंदर आक्रोश और जोश ने दहाड़ मारी। मैनें अपने दोनों हाथों से भीड़ को जोर लगाकर ठेला। उस समय मेरे शरीर में जैसे हाथी का बल आ गया था। सैकड़ों लोग गिर गए। मैनें पुलिस को बुरा-भला कहते हुए चिल्लाया। उन्हें खरी-खोटी सुनाई कि तुमलोग यही सुरक्षा कर रहे हो। चुपचाप खड़े हुए देख रहे हो तमाशा। अब तक पुलिस आकर भीड़ को नियंत्रित कर रही थी। मैने किसी तरह उत्तरा और संजय को उठाया। पुलिस को उसकी अकर्मण्यता के लिए फिर जोरों से डाटा। पता नहीं क्यों पुलिस जैसे मेरे एक-एक वाक्य से घबड़ा रही थी। पुलिस के सिपाहियों ने भीड़ पर काबू पाने के लिए लाठी चलाने लगे। मैने फिर उनको रोका। नहीं तुमलोग ऐसा मत करो। पुलिस ने हम चारों को कपिल मुनि मंदिर के पास तक ले जाने मेंसहायता की और कपिलमुनी का दर्शन कर उस खुंखार भींड़ से बाहर निकलकर लगा एक मृत्यु संसार से वापस लौट आया।

प्रेम की महत्ता

प्रेम हमारे हृदय की
सर्वश्रेष्ठ, सुन्दर, सौन्दर्य ग्राही अभिव्यक्ति है
प्रेम जीवन की शक्ति है
किन्तु प्रेम की भाषा अबूझ होती है
जब तक कि आत्म-समर्पण, निष्ठा और
विश्वास के हृदय रस में
उसे नैवेद्यित नहीं किया जाता
वह सुदृढ़ नहीं हो पाता
उसका नाता
प्रेम का संबंध हमारे आचार-विचार से
इस तरह बंधा होता है
हमारी निश्छलता से सधा होता है
प्रेम हमारे भीतर सर्जित शक्तिमान सत्ता है
जीवन में पग पग पर संबंध सेतु गढ़ने में प्रेम की
मूल्यवान महत्ता है।

सेना बनाम सरकार

सेना और सरकार के बीच विवाद और अन्तर्विरोध दुर्भाग्य जनक है। इससे देश की सुरक्षा में लगी सेना का मनोबल घटता है। बल्कि सरकार की भी भद्दगी होती है। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी देश का नाम उछलता है। सरकार को सेना प्रमुख  जेनरल बी. के. सिंह के मामले को तुरन्त सुलझा लेना चाहिए। ऐसा भारत की जनता भी चाहती है। इस विषय में लगभग 20 प्रबुद्ध व्यक्तियों से बातचीत के दौरान सभी का यही अभिमत पाया।

Thursday, 12 January 2012

शब्द अस्तित्व

मैं शब्दों का सिपाही हूं
कलम है मेरा अस्त्र
आज दुनिया जिस तरह झेल रही आत्म-विमर्ष
रोटी, आजादी और शांति के लिए
कर रही संघर्ष युद्ध-विद्ध संत्रस्त
मैं  शब्दों से इस लड़ाई में सम्मिलत हूं
कलम है मेरा अस्त्र....
लोभी, लालची, भ्रष्टाचारी सत्ता धारी
पड़ रहे हैं सामान्य जन पर भारी
वे एक के बाद दूसरा, तीसरा, चौथा...
इसी तरह बहुत सारे चक्रव्यूह
बहुत सारे जन-विरोधी तरीके रचते हैं
किन्तु जन-आंदोलनों से बचते हैं
अर्थ जनित अस्थिरता के बीच
अस्तित्व के रक्षार्थ मेरी लड़ाई है
ऐसे में यही सच है कि अस्तित्व संघर्ष-पथ का राही हूं
मैंने भी अपनी शब्द-सेना सजाई है
भूखा ही सही परन्तु शब्द-शाही हूं
मैं शब्दों का सिपाही हूं
जन्म से मृत्यु तक साथ
चलती रहती हमारा यारो
मौन रहते हुए
हमारे आसपास
हमारे भीतर
शब्द-प्रवाह अपनी गति से चलता है
शब्द-वृक्षारोपण जिस तरह से
संवेदना की मिट्टी में पलता है
उसी तरह का फल फूल होता है
शब्द-यारी अस्तित्व की नियति है
जो अत्यंत जरूरी, अत्यंत न्यारी है।
जीवन पर्यंतमय अपने पथ का राही हूं
शब्दों का सिपाही हूं।
                       दिनांक - 12.01.2012


प्रेम की महत्ता
प्रेम हमारे हृदय की
सर्वश्रेष्ट, सुन्दर, सौन्दर्य ग्राही अभिव्यक्ति है
प्रेम जीवन की शक्ति है
किन्तु प्रेम की भाषा अबूझ होती है
जब तक कि आत्म-समर्पण, निष्ठा और
विश्वास के हृदय-रस में
उसे नैवेद्यित नहीं किया जाता
वह सुदृढ़ नहीं कर पाता उसका नाता
प्रेम का संबंध हमारे आचार-विचार से
इस तरह बंधा होता है
हमारी निश्छलता से सधा होता है
प्रेम हमारे भीतर सर्जित शक्तिमान सत्ता है
जीवन में पग-पग पर संबंध-सेतु गढ़ने में प्रेम की
मूल्यवान महत्ता है।
                    -दिनांक - 13.01.2012

अन्ना ने दिया देश-गान स्वर

अन्न ने दिया देश-गान-स्वर
बोलो - भारत माता की जय
इन्कलाब-जिन्दाबाद
भ्रष्टाचार के विरुद्ध करना है संघर्ष
होकर निडर
 इस नए वर्ष
                                   - 08.01.2012


आकाश-खेला के आयाम
मैं प्रत्यूष वेला के
आलो-छाया में डूबे आकाश को
रोग-सैया पर अधलेटा
अधखुली खिड़की से देख रहा,
कलकत्ता में अधिकांश लोग  सोए हैं अभी
अथवा अपनी खुमारी हटाने के लिए
चाय के प्याले खनखनाते होंगे
रास्ते खाली पड़े हैं
यातायात थमा हुआ है
रह रहकर आकाश में नीचे उतरते, पंख फैलाए
हवाई जहाज की आवाजें
आकाश के मौन को तोड़ती हैं
अथवा किसी वाहन के तेजी के साथ गुजरने के शब्द
कानों में आते हैं
सोचता हूं, यह आकाश, ये रास्तें, गलियां, सड़कें
सम्बन्धों और दिनचर्या के कितने सारे तार जोड़ती हैं
गांवों से नगरों तक
इस देश से अन्ना देशों तक
मनुष्य कितने सारे उपायों, कारनामों से
अपने सपने पूरे करते हैं
यही वह आकाश है अपनी अखंड नीलिमा में फैला अनन्त
मौन, शान्त, अविभ्रान्त, अभ्रिय मान
जो सर्जित करता बादल, हवा, तूफान
सागर की लहरों को बुलाता आ आ आ
युगों से रखता आया है अपना अस्तित्व अक्लान
दिखाता है सबेरे से शाम और रात में भी
अपना उल्लास अनस्वर नित नए रूप
विविधवर्णी खेला के...
                                 दिनांक - 09.01.12

रिक्त मन की चाह
अजनवी सी तुम हृदय आरण्य के आरपार
ज्योत्स्ना ज्योतित संघन अमराइयों सी
प्राण-अन्तस को धनुष की डोर बन कर
तानती, टकॉर करती
प्रेम-सर संघान करने के लिए
आंख के कितने प्रलोभन दिए
तुम मदिर मधु-गंध सी मादक हवा बन बह रही
आह, कितनी बार भूला राह
अन्तर में धिरे अंधियार में
तुम धूप बनकर आ गई
भरने अचानक रिक्त-मन की चाह।
                     दिनांक - 10.01.2012



शब्द-सत्ता
वह कौन था जिसने गहन सन्नाटे के बीच
प्रथम शब्द 'ओम् ' का नाद किया
हवा, रोशनी, जल, पृथ्वी, आकाश के
विविध आयामों से,
मन, बुद्धि, ज्ञान, विज्ञान के अनन्त स्रोतों से जोड़ा
हमें प्रेम और कर्म के विविध मंत्र दिए
शब्द स्वर-गान से परिचय कराया
आखिर वे आदि पुरुष कौन थे
जिन्होंने जन्म लेने पर शिशु रुद्न के रूप में प्रथम शब्द दिए
और पग-पग पर
शब्द-ज्ञान, धर्म-अधर्म, कर्म-अकर्म की समझ
जीवन जीने के मर्म समझाए

आखिर वे कौन थे
जिन्होंने वेद, ब्रह्म, परामन भाव-संवेदना के
विविध रुपों से परिचय कराया
नए नए सपने गढ़ने
महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के नए नए गुरु सिखाए

मैं खोज खोज कर हार गया
और नए नए पथ -अन्वेषण, संयोजन के समय
यही पाया कि
जिसे अनन्काल से खोज रहा था
वह तो हमारे भीतर ही है समाया।

      दिनांक - 11.01.2012

Literary Biodata Swadesh Bharati

Swadesh Bharati, recipient of Vishwa Hindi Samman for his outstanding contributions in the field of language and literature at 8th World Hindi Conference - 13-15th July, 2007 at New York, USA. sponsered by Ministry of external affairs Govt. of India, Uttar Pradesh Hindi Sansthan (UP Govt’s) “Premchand Award” and “Sahitya Bhushan Award” and about 100 Nation/International & other Awards. Since 1958 he lives in Kolkata from where edits “RUPAMBARA”- a literary bilingual quarterly journal. He has been in active field of creative writing since more than 55 years. Born at PRATAGARH (U.P) on 12.12.1939 and educated at I.K.M. Inter College Anapur, Allahabad, Eving Christian College, Allahabad,  Annamalai University, Chennai with MA Degree in public Administration and got Mahamahopadhyay (Doctor of Literature) from Hindi University, Hindi Sahitya Sammelan, Allahabad. He received Diploma from School of Humanistic and Cultural Studies, Ram Krishna Mission, Kolkata.
He started writing at the age of 12 years. Sri Bharati’s Poems are included in a number of Hindi Magazine and other Indian Language Journals. Is poems are included in  “Chautha Saptak” (The Fourth Raga), a historic Hindi Poetry Collection edited by “Ajneya”, internationally acclaimed poet and Author. Sri Harivansh Rai Bachchan  has also included his poem in his famous collection Hindi Ki Sarv Shresht Kavitayein. His poetry reveals the inner depth of mystic nature’s enchanting beauty, the struggle and existence of mankind. The critics describe his Poetry as multi-dimensional, the expression of nature, and the modern lifes’ decadence with new awareness and an expression of stream of new consiousness, freedom, peace, love and happiness for making a new generation of world joyful. He has widely travelled in India and abroad, that is why his expressions have multi-dimensional shades and experiences. He has to his credit 24 collection of Poems 8 Novels & 45 Edited works, published about 150 volumes of Rupambara-literary journal by remaining its editor for the last 47 years. He received Premchand Award from U.P. Govt. In 1989 on his Novel ‘Auratnama’ (The women hood). He travelled in U.S.A., Britain, France & other countries to participate in Poetry Symposiums and meetings of Board of Directors of  International Childrens Community Foundation as its director.  He received Hindi Seva Samman (Award for contineous writing) awarded by Mysore Hindi Parishad at Vigyan Bhavan, New Delhi on 29th October 1994. Honoured with Sahitya Bhushan  Award by U.P. Hindi Sansthan Govt. of  UP. Lucknow on 27th December, 2001. Honoured for remarkable achievements in Hindi literature & services to Hindi & other Indian Languages by National Institute of Teachers Technical Training & Research, Bhopal. Govt of India nominated him. Member of Kendriya Hindi Samiti constituted under the Chairmanship of Hon. Prime Minister, India. Also nominated as member - Ministry of Textile & Ministry of Power Hindi advisory committee Govt. of India. He was awarded Vishwa Hindi Seva Samman for his valable Contribution in the field of Language and literature Nagri Prachar Sabha has awarded him Nagari-Ratna Samman on 14.09.08 at Deoria (U.P.). Sri Bharati was felicitated by Mitra Mandir, the famous cultural & Social organisation of Kolkata for his contribution towards Language and literature. On 26th Maty 09 the Literary Club, Bhilai Steel Plant has awarded Pramod Verma Sahitya Samman and Chhatisgarh Hindi Lekhak Sammelan Awarded Pt. Rajendra Prasad Shukla Sadbhawna Sahitya Samman on     28-05-09 at Raipur. ‘Golkonda Darpan’ & Geet Chandni felicitated at Hyderabad on 29.8.10. Lt. Gen. Governor Puducherry Honoured him on 4.10.10 at Rajniwas, Puducherry. Nominated by Govt. of India Hon. Member of Rajbhasha Hindi Advisory Committee of Ministry of Finance. He was honoured by Kaviteerth Sahitya Academy, Kolkata on 31.12.1911.
Swadesh Bharati. has contributed a lot through his Poems, Short stories, Novels to Hindi & Indian Languages especially Bengali, Oriya, Telugu, Tamil, Marathi, Konkani etc. such as DESH, ANAND BAZAR PATRIKA, KRITTIBAS, KALIKALM, ANUVAD PATRIKA, and other Indian literary Journals widely published his work. Poet Bharati was attached with eminent writers of Indian and foreign Languages. He has translated the selected Bengali Poetry & published Modern Indian Poetry - Bengali. The farmous names included Noble laureate Rabindra Nath Tagore (The Last Poems), Sakti Chattopadhyay (Aboni Badi Achho), Subhas Mukhopadyay and other famous Bengali poets. He also translated in Hindi the collection of Poems entitled ‘Jeebna Das Ki Shrestha Kavitayein’. Sri Bharati also edited Modern Oriya Poetry in English & Hindi  also he edited alongwith several anthologies in Hindi selected from contemporary Oriya Literature. The Indian Poetry today-Telgu included Poems of 8 Digambara Kavulu (The Naked Poets) of  modern Telugu Poetry, selected poems of Tamil, Marathi, Konkani, Bengali & other Indian Languages.
Published Works
   1.    Ikees Subhah Aur    (Poetry Collection)    1969
        - 21 Mornings more    (Tr. & Pub. In Oriya)
    2.    International Poetry Number; Vo., 1    (Poetry Collection containing selected
            Poetry of 16 major world languages)    1969
    3.    Indian Poetry Todya - Marathi    (Poetry Collection)    1969
    4.    Indian Poetry Today-Telegu    (Poetry Collection)    1970
    5.    Shav-Yatra    (Novel)    1970
        - The Funeral Procession    (Tr. & Pub. in Oriya)
    6.    Satven Dashak Ki Shreshtha Kahaniya (Best selected Short Stories)    1970
        - The Best Strories of 7th Decade in Hindi
    7.    Mahanagar    (Selected Short Stories)  1970
    -    The Metropolis
    8.    Indian Poetry Today-Bengali    (Selected Bengali Poetry Collection)    1971
    9.    Indian Poetry Today - Oriya    (Selected Oriya Poetry Collection)    1974
    10.    Awajon Ke Kathghare Mein    (Poetry Collection)    1976
        -Amidst the stockade of sounds
    11.    Tapis Mitati Nahin    (Poetry Collection)    1976
        -Thirst Never quenches
    12.    Poems included in Chautha Saptak    (Poetry Collection)    1981
        - The fourth Raga
        - (Edited by Ajneya, the famous poet)
    13.    Man Chahta hai Apanapan    (Poetry Collection)    1981
    14.    Sampratik Hindi Sahitya-Rachana Aur Alochana    (Literary Criticism)    1981
        -Creation & Criticism in contemporary Hindi Literature
15.        Hindi Ki Sarvashreshtha Kavitayen    (Poetry Collection)    1981
        The best Poems in Hindi
        (Edited by Harivansh Rai Bachchan, the famous Poet,
        father of super film star Amitabh Bachchan
16.        Doosra Vamachar    (Long Verse)      1983
        -The second thinker         1990
17.        Kathanagar    (Short stories)    1984
        -The story-city
18.        Auratnama    (Novel)    1984
        -The Womanhood (Premchand Award winning book)    (Tr. in Oriya)   
19.        Saharyar    (Novel)    1985
        (The city friend)    (Tr. in English)
20.        Bhare Hat ke Beech    (Tr. & Pub. in Oriya)    1987
        - Amidst the crowded market    (Poetry Collection)
21.        Samkaleen Hindi Kavitayen        1984
        -(Contemporary Hindi Poetry Collection)
22.        Samakaleen Oriya Kaveitayen    (Oriya Poetry Collection in Hindi)    1984
        --(Contemporary Collection of Oriya Poetry)
23.        Jeebananda Das Ki Kavitayen    (The best Poems of Jeebananand    1984
            Das in Hindi, Tr. from Bengali)
24.        Calcutta O’ Calcutta (1st Vol.)    (Long Poem on Calcutta)    1990
25.        Yatna Shivir
        - The Concentration Camp    (Novel)    1990
        (Based on Bangladesh Liberation Struggle)    (Tr. in Bengali)
26.        Trasadi Ke Dwar par    (Poetry Collection))    1991
        --(At the Door Step of Decadence)
27.        Sidhian Chadhta Surya    (Poetry Collection)    1994
         (Steping up sun)
28.        Ghatana-Durghatna    Novel    1994
        -(The Incident-Accidents)    Novel   
29.        Surya Ka Ahat Maun    Poetry Collection    1999&07
        (The Wounded Silence of the Sun)
30.        Anantah (The unending)    Poetry Collection    2001&07
32.        Samay Ki Jarjar Nav Mein (In the broken boat at time)    Poetry Collection    2001&07
33.        Sagar Priya (The ocean beloved)    (An Epic)    2005
34.        Hindi Ki Vikash Yatra        2005
        (Progress-Journey of Hindi)    Research contents   
35.        Shabdateet     Poetry Collection    2005
        (Beyond words)
36.        Kolkata O’ Kolkata (Vol I & II)    Long Verse    2005
37.        Nagar-Bandhu (The City Friend)    Novel    2006
38.        Karyalayeen Hindi Prayog & Vividh Sandarbh        2006
        Related to Official Language implemantation and Hindi Workshop Help Literature   
39.        Mungeri Lal Ka Prajatantra    Long Verse    2007
40.        Ecoing-Silence of the Falling Leaves    Selected Poems in English    2010
41.        Aranyak (The forest Mate)    Novel    2011
42.        Bhagta Hua Samay (Running of time)    Poetry Collection    2011
43.        Comprehensive Technical Terms Dictionary (Glossary)     English/Hindi    2012
44.        Shrestha Laghu Kathayein    Collection of short stories (Ed.)    2012
Special Features of Literary and other Achievements
1.     Works Translated/Published in mostly all major. Hindi, English, Oriya, Tamil, Malayalam, Bengali, Nepali, Konkani and other Indian and foreign journals. Participated in a number of Poetry Seminars/Conferences in India and abroad. Works covered by A. I. R. Doordarshan (TV) and other media. Organised several writers workshops/Seminars/Conferences sponsored by Central Hindi Directorate (Ministry of Human Resource Development, Department of Education and Culture, Government of India),  Faculty guide of several Workshops organised by Central Hindi Directorate, NCERT and other universities. Acted as a member of Selection Board for recruitment of Hindi Officers instituted by Steek Authority of India and several PUC’s.
2.    Editing Rupambara, a bilingual literary journal published in Hindi and English since 1965.
3.    In 1964-65 he received Diploma on study of Vedanta & World religion from School of Humanistic and Cultural Studies, Ram Krishna Mission Institute of culture, Calcutta, Founded Writers Colony (Vishwamukti), At the  beautiful Chilka Lakes on Orissa coast and working as its Founder-Chairman since 1971, which is being established for the development of Indian Languages and welfere of young Indian writers and poets. Founder-President of Rastriya Hindi Academy, (National Hindi Academy), Forum. Established Indian Writers Andman Hindi Academy. Life-member- ISKCON, Ex-member Director, Lions Club International and engaged in several Philanthropic activities.
4.    Founded National Hindi Academy in 1965 (Rastriya Hindi Academy) under Sri. Bharati’s chairmanship and guidance 24 All India Offical language Conferences, International Seminar on Literature were organised sucessfully at Bhubneswar (Orissa), Darjeeling (W.B.), Portbalair (Andaman & Nicobar Island), Gangtok (Sikkim), Ooty (Tamilnadu), Goa, Kathmandu (Nepal), Kovalam (Kerala), Kalimpong (W.B.), Shillong (Meghalaya), Shimla, Pondichery, Tirupati, Shantiniketan, Mysore, Nainital, Puri, Manali, Gopalpur, Mount Abu etc. National Conventions on Official Language, National Poets Meet, Young Writers Seminars, International Seminar on Literature at different places of the country have proved very effective for National Integration and development of Indian Languages along with Hindi, Instituted several National & Internation  Awards on literature of great masters of 22-Indian & Foreign Languages for friendship, peace and universal brotherhood.
5.    Besides a creative Poet and Author, Swadesh Bahrati has given a new direction to the young, emerging poets and authors of Indian Languages and Edited more than 40 new writers series-books by young writers. He has been relentlessly working for develpment and spreading of Hindi as National Language and the Language of U.N.O and also working for develpment of other Indian Languages. He attended Board Meetings of Internationa Childrens Community Foundation (ICCF) at Morgantown (USA) New York and other places as a member of Board of Directors in 1989. Attended 6th and 8th World Hindi Conference (Vishwa Hindi Sammelan) at London (U. K.) in 1999  New York (USA) in 2007 & visited other countries.
6.    Received Premchand Award by Uttar Pradesh Hindi Sansthan Government of Uttar Pradesh on his Famous Novel “Auratnama” (The womenhood) in 1989. Sahitya Mahopadhyay (Doctor of literature) Honour by Hindi Sahitya Sammelan, Allahabad in 1993 and “Shrestha Kriti Award” given by ‘Tamsuk’ at East Zone Poets Conference, Coochbihar in 1993. Hindi SEVA SAMMAN for continuous writing of creative literature) at Vigyan Bhawan, New Delhi in 1994 by Mysore Hindi Parishad. Felicitated by Govt. of Himachal Pradesh at Shimla in 1998. Felicitated by Dakshin Bharat Hindi Prachar Sabha. Tamilnadu Hindi Academy at Chennai. Felicitated by Osmania University & Womens College, Hyderabad during 1999. Sri Bharati played active role in recognition of Nepali, Konkani & Manipur Languages in the 8th Schedule of Indian Consitution in 1992. This has been proved as a great contribution in integrating the country. Due to Sri Bharati’s relentless effort’s All India Official Language Conference and International Seminar on literature were organised at Kathmandu, Nepal in 1996. About 200 Nepali, India authors were invited. They discussed and exchanged thoughts about Nepali, India  & Hindi Languages. This Conference was very useful in lessening tension and anti India feelng in Nepal.
7.    International Poetry Number edited by him containing the best selected Poems of 16 languages of the world was well received by Press and Poetry lovers world wide.  Also Edited 30 Special Numbers of Rupambara on various aspects of creative writing and development of Hindi Language along with other Indian languages.
8.     His Biodata is included in ‘who is who in the world’, who is who in literature’  ‘Asian -American  Authors, Who is who’, ‘Asia Pacific, Pub. by Sahitya Academy who is who’ in Indian Literature’, and several other reference directories in India and abroad. More than 200 books, journals in Hindi & other languages published his poems and other works. All India Radio, Doordarshan, Calcutta, Lucknow, New Delhi, Ahemedabad, Gangtok, Portblair, Guwahati, Goa, Simla and other stations has  broadcasted, Telecast his works. Selected as the man of the year 1999 by American Biographical Institute INC (USA).
9.    Research work done by research (PH.D.,D.Lit., M.Phil) Scholars on his Novels & Poetry instituted by Osmania University,Hyderabad, Chennai University, Kanpur University, Mysore University, Kerala University and several other Universities.
10.    Received Sahitya Bhushan Honour on Literature) by U.P. Hindi Sansthan Lucknow in 2001.
11.    His works contain special appeal for universal love, Affinity, brotherhood and world peace, a fine interpretation of nature & human existence, a deep insight of Indian culture and richest heritage.
12.    He is at present founder, Chairman, Rashtriya Hindi Academy and Editor Rupambara and connected with several News papers & other media in India and abroad.
13.    Hindi website www.rastrabhasha.com & Blogs has been started in 2011 covering  his writing and entire spectrum of Hindi Literature for Indian and Internatinal  readership through Hindi Internet.
14.    He has been Nominated as Hon. Member of Kendriya Hindi Samiti consitituted under the Chairmanship of Hon. Prime Minister, Govt. of India (2004).
15.    Nominated as Member, Ministry of Textile - Hindi Salahkar Samiti and Ministry of Power - Hindi Salahkar Samiti (2005) and member of Ministry of Power Hindi Advisory committees.
16.    Felicitated by NIT TR, Bhopal, Madhya Pradesh Writers Association, Bhopal, Madhya Pradesh, Women Writers Association on 29.05.05 at Bhopal.
17.    He received Hindi Seva Samman at ‘Hindi Kumbh’ Bangalore given by H.E. Governor, Karnataka Hon. Ex. Minister of RD. and Hon. Minister of Labour, Govt. of India, organised by Mysore Hindi Parishad on 11.01.06
18.    He was Honoured at 8th World Hindi Conference, New York (USA) on 15.07.07 with International Honour for Hindi Literature (Vishwa Hindi Samman) & felicitated by Mitra Mandir Kolkata (A Literary and Cultural Organisation) on 14.10.07 & felicitated by Nagri Pracharini Sabha, Deoria (UP) with Nagri Ratna Hon. on 14.09.08. Felicitated with pramod Verma Sahitya Samman and Pt. Rajendra Prasad Shukla Sadbhavna Sahitya Samman by Chhatisgarh lekhak Sammelan. Hounored by Golkonda Darpan & Geet Chandni on 29.8.10 at Hyderabad. H. E. Governor, Puducherry Felicitated on 4.10.10 at Pondicherry.
19.    Currently working on his two Novels Amrit Sagar Ki Khoj (the Search for Necter sea) and Retghar (The house of sands). More than 11000 Poems written by the Poet contineously one on each day are still to be published apart of 24 Poetry collections already Published.
20.    Nominated as Hon. Member-Ministry of Finance Hindi Salahkar Samiti in November 2010,
21.    Honoured by Kavi Teerth Sahitya Academy on 31.12.2011 at Kolkata.

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Saturday, 7 January 2012

काव्य- रूप

कविता का सौंदर्य, संवेदना, शिल्प,
सुचिन्तन की श्रेष्ठता,
भाषा-सौष्टव, प्रेम की अभेद्यता
कविता छान्देयता का प्रतिरूप है
कविता अंधकार के बीच
सोनाली, बहुरंगी धूप है
वर्ना कविता शब्द अंध-कूप है।


देश-प्रेम  (02.1.12)
निष्काम जन-सेवा
राष्ट्रीयता, देश-धर्म की पहली शर्त है
इसके बिना लोभी, भ्रष्टाचारी नेता की
अनर्गल देश-सेवा व्यर्थ है
समर्पण, आस्था और विश्वास के ढांचे में ही
अस्तित्व पलता है
मनुष्य का होना ही प्रेम का अर्थ है।

अतीत का मोह बंधन  (03.1.12)
अतीत के पीछे भागने से
कुछ हाथ नहीं आता है
स्मृतियों के कुहासे में
जीवन के मधुमय क्षणों को खोजना
सदा ही व्यर्थ हो जाता है
चाहे जितना जैसे भी यत्न करता रहूं
अतीत, वर्तमान के पीछे
चलता हुआ
अपने गन्तव्य-भविष्य की ओर बढ़ जाता है
अतीत अपने इतिहास को दोहराता है
वापस लौट कर नहीं आता है।

असमर्थता  (04.1.12)
चाहत के रंगों में रंगा हुआ
अन्तस बेचैन रहता है
वह रात का अंधकार
और दोपहर की कड़ी थूप में
अपना आहत मन ढोता हुआ
वर्तमान को जीता है, मौसम-परिवर्तन सहता है
देखने में भरा भरा रहता निरुपाय
किन्तु भीतर से रीता है असमर्थ, असहाय
किस तरह वह विविध संदर्भो में जीता है।
अतीत तो अपना अंतरंग भरता है।
हमारे कंधों पर टंगा हुआ।

अन्तस का मौन  (05.1.12)
वह कौन है? क्या है, कैसे, कैसे, किस प्रकार अन्तस् को मैला कर जाता है
फिर वह कर्म का प्रारब्ध बनकर
जीवभर सताता है।
वह कौन है, किस किस तरह
मैलापन को साफ कर जाता है
कर्म का आश्वाद देकर
हमारी अकर्मठता को नींद से जगाता है।
वह कितने सारे रास्तों से आकर
मेरे भीतर मन के अन्तराल में समाता है
और मुझे आस्था और विश्वास के साबुन से
परिष्कृत कर जाता  है।
वह प्रेम की प्रतीति ही तो है
जो कर्म की श्रद्धा बन
हमें अंधकार से
प्रकाश की ओर ले जाता है।

कहत-कबीर  (06.1.12)
सुनो भाई कबीर मेरी बातें
कैसे सोता दिन और
जागती रातें, कैसे कैसे मन से मन में
होती प्रेम-सगाई
बनते टूटते संबंध और नाते
अन्ततः कहां हम, कब
अपने को पहचान पाते
अंर्तमन की सुन पातें बातें
देख समझ पातें अलख सबेरे
नदी-प्रवाह के ऊपर उड़ती
हंसों की पांते।

विगत-स्वगत (07.1.12)
मैं पीछे लौटना नहीं चाहता
नाही मुड़कर देखने की ही चाह है
बस आगे बढूं, बढ़ता जाऊ हथेलियों में नवोछ्वास के फूल लेकर
और उस विन्दु तक पहुंचूं
जहां स्मृतियों बंशी की तान पर साध रही हो
नए नए स्वर
नए नए गान

मैं पीछे लौटना नहीं चाहता
एक नए युग का निर्माण मेरा लक्ष्य है
जहां पहुंच कर
भक्ति भाव से अर्पित कर सकूं
नव-सृजन के पावों पर
आस्था, विश्वास, समरसता के फूल अम्लान
मैं पीछे लौटना नहीं चाहता
जड़ता और तटबंधता को छोड़ कर
अन चाहे अतीत को
समय-प्रवाह में समर्पित कर
अभिनंदित करना चाहता हूं
अपनी मिट्टी की शान
सर्जित कर
नव-शब्द-स्वर-गान।


वर्ष 2011 चला गया


वर्ष 2011 चला गया
निर्विकार और देता गया भाव-प्रतिभाव
हर्ष विमर्ष
छोड़ता गया अपना प्रभाव,
इस वर्ष
काव्य प्रेमियों, पाठकों के लिए मेरे दो काव्य संकलन
और एक उपन्यास प्रकाशित हुए
गिरती पत्तियों की मौन प्रतिध्वनि - काव्य संगलन (अंग्रेजी अनुवाद सहित)
Ecoing Silence of the Falling Leaves
भागता हुआ समय - काव्य संकलन
आरण्यक - उपन्यास

अब तक 32 वर्षों से लगातार डायरियां लिखता लगभग 12000 कविताएं लिख पाया और 24 कविता - संकलन तथा 8 उपन्यास कई सारे संपादित मेरा यत्न रहा है कि कुछ और अधिक लिखूं, कुछ और किन्तु दो वर्ष से असाध्य बीमारियों ने अशक्त बना दिया। किन्तु आशा और विश्वास ने जीवन के प्रति प्रबल आस्था-बल दिया और जितना भी साहित्य-कार्य ने अंधेरे में प्रकाश का काम किया। कुहासा भरे अंधकार में रास्ता सुझाया।

31.12.2011
नव वर्ष की पूर्व संध्या पर
मैं बहता हूं
विचारों के तीव्र बहाव में
शब्द-अर्थ के भाव-अभाव में
संवेदना की लहरें बारबार
हृदय-तट से टकराती 
छोड़ जातीं रेत की पर्तें दर पर्तें
बार-बार आतीं
अतीत के पाषाण- अनुबन्धों को तोड़ती
कण-कण, क्षण-प्रति क्षण
अंतर की अव्यक्त अभूर्त-कथा कह जातीं
गुंजरित करती नए नए स्वर
नव वर्ष की संध्या पर

 

Sunday, 1 January 2012

Anna. let the New Year 2012 be prosperous for the country

Happy New year and best wishes to Anna & youth of new India.
Let the country should be free of corruption, nepotism, selfishmness, Black money and bad leaders.
Let the contry should be free of corruption nepotism, selfishness, black money and bad leaders.

Let the poverty ridden people should be uplifted. They should feel freedom and happyness.
Let the country should move forward and become the greatest power in the world.
Let the people of India should follow peace, non-voilence and Truth, follow the Gandhian way of life.
Let us love the mankind which is highest prayer to God.