Monday, 4 July 2011

असमर्थता

एक टूटन
एक घुटन
एक आत्मपीड़न हो तो कहूं...
एक दर्द
एक चोट
एक आघात हो तो सहूं..

गन्तव्य-सागर के बीच
ऊंची लहरों
और उन्मत्त तूफान से बचता
कब तक
आखिर कब तक
अपने अभीष्ट के लिए खंडित प्रवाह में बहूं...

अन्तस् की पीड़ा
कैसे, किस किस से कहूं
या चुप रहूं

1 comment:

  1. Nice Dad. However a sad one. Life is not all struggle. without struggle I guess life would have never been so colorful.

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