Tuesday, 12 July 2011

लड़की हंसती है

लड़की हंसती है
हंसी से दोहरी होती है
क्योंकि उसके आंचल में
मखमली रोओं वाली
नीली आंखों की चमक लिए
बालपन की बिल्ली खेल रही है

लड़की रोती है।
जार-बेजार
क्योंकि उसके सीने में
धड़कता हुआ दिल है
जिसे किसी बेरहम ने
प्यार-प्रवंचना की क्रूरता से खरोंचा है
अब वह लड़की
असमर्थता की बैसाखियों पर चलती
दिन रात पलकें  भिंगोती है
न हंसती है
न रोती है
खालीपन-पतझर में
वृंतहीन फूल की पीली पंखुड़ी बन
समय की धूल में मिलने के लिए
निजता खोती।

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