Thursday, 23 October 2014

Deewali Greetings

दीपावली वर्ष में आती है सिर्फ एक बार
संबंधों और मित्रता का उत्सव मनाने
सुशोभित करने
संप्रीति की जीवन्तता
और यह कहने प्रिय जनों को-

शुभ दीपावली पर
                 हार्दिक शुभकामनाएं

Dipawali comes loaded with joy and Happiness
once in a year
to celebrate and decorate
relationship, friendship
to adorn the love forever
and utter-
Happy Diwali
                Greetings, best wishes
                                        to all my dear.

Saturday, 4 October 2014

मन की बात

माननीय प्रधानमंत्री जी,
                          सादर प्रणाम।

आपके प्रधानमंत्री-कार्यकाल की दो विशिष्ट योजनाएं राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं -
1) प्रधानमंत्री जन-धन बैंक खाता योजना
2) स्वच्छ भारत अभियान

प्रधानमंत्री जन-धन बैंक खाता योजना को भ्रष्टाचार मुक्त तरीके से सफल बनाना है।

स्वच्छ-भारत अभियान को सघन, प्रयोजनीय, सार्थक एवं कार्यकर बनाने के लिए मनुष्य और आधुनिकतम मशीनों का इस्तेमाल जरूरी है।

दोनों योजनाओं को लालफीताशाही से अलग रखना है।

सादर,

आपका,

स्वदेश भारती
(अध्यक्ष- राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी, कोलकाता)


आपने अपने चुनाव-अभियान में सारे भारत में सैकड़ों जनसभाओं को हिन्दी में संबोधित किया। जनता ने आपको बहुमत दिया। यह प्रबल जन-आकांक्षा है कि हिन्दी को राष्ट्रसंघ की भाषा के रूप में स्वीकृति प्राप्त हो। यह 90 करोड़ भारतीयों एवं अप्रवासी भारतीयों की अाकांक्षा है।

आपने भूटान, नेपाल, जापान, अमरीका, राष्ट्रसंघ में हिन्दी में ही भाषण दिये, विश्व नेताओं से हिन्दी में बातचीत की, परन्तु संभवतः भूल गए कि अपने भाषणों और बातचीत में हिन्दी को राष्ट्रसंघ की भाषा तथा भारत को सुरक्षा परिषर का सदस्य बनाए जाने की जोरदार अपील नहीं की। इससे हिन्दी भाषी जनता को निराशा हुई है। आपसे प्रार्थना है कि हिन्दी को राष्ट्रसंघ की भाषा स्वीकृत कराने के लिए तथा भारत को राष्ट्रसंघ सुरक्षा परिषद का सदस्य बनाने के लिए सार्थक एवं सघन प्रयास करने की कृपा करें।

यह कार्य आपको इतिहास पुरुष के रूप में आंका जाएगा। भारत में ही नहीं विश्व के बहुत सारे देशों के प्रवासी भारतीयों के बीच आपके प्रतिष्ठा बढ़ेगी। राष्ट्र गौरवान्वित होगा राष्ट्रभाषा हिन्दी को विश्वभाषा बनने का सौभाग्य प्राप्त होगा।

माननीय प्रधानमंत्री जी किसी भी स्वतंत्र, सारभौम, जनतांत्रिक राष्ट्र के मुख्य रूप से चार आधार स्तम्भ होते हैं-
1) संविधान
2) राष्ट्रगान
3) राष्ट्रध्वज
4) राष्ट्रभाषा

हमें तीन आजादी मिली है। चौथी अभी तक स्वाधीनता के 68वीं वर्ष भी नहीं मिल पाई जो भारत की मुकम्मल आजादी के लिए अत्यंत जरूरी है।

अतः आपसे सादर प्रार्थना है कि हिन्दी को विश्व भाषा के रूप में राष्ट्रसंघ की भाषा स्वीकृत कराने की दिशा में यथोचित कार्रवाई शीघ्र करने की कृपा करें तथा भारत को राष्ट्रसंघ-सुरक्षा परिषद का सदस्य बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभियान शुरू करें।

नवरात्रि एवं दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं

अत्यतं आदर एवं सम्मान सहित,

आपका,

डॉ. स्वदेश भारती
(अध्यक्ष- राष्ट्रीय हिन्दी आकादमी, कोलकाता)


प्रतिष्टा में
श्री नरेंद्र मोदी,
माननीय प्रधानमंत्री
भारत
7, रेस कोर्स मार्ग,
नई दिल्ली - 110 011