Sunday, 31 March 2013

दोबारा आने का गीत

सिवान के कुहासा में डूबी झील के किनारे
सारसों के जोड़े
अपने पंख हिलाकर
एक दूसरे को प्रेम दर्शाते
सघन पेड़ों से उड़कर तलहट्टी का लेते चक्कर
पंछी क्षितिजों में चक्कर लगाते
गीत गाते जगती को नवसंदेश देते
वही दृश्य आज मस्तिष्क की पर्तों के बीच साकार हो उठा
किन्तु कहां मिलेगा वह दृश्य
आज की सभ्यता के बाजार में
व्यावसायिकता के संसार में
जहां आदमी मशीन हो गया है
और भाग रहा निजता की संकरी  सड़क पर
कहां से लाऊं
सिवान के क्षितिज पर
चक्कर लगाते पंछियों का गीत स्वर
बस यादों में वह सब बसाना है
मधु स्वर सुनने के लिए दोबारा आना है।

बैंगलोर
23.02.13





अटूट बंधन
जिस बंधन से बांधना चाहा अपनत्व
दे नहीं पाया अटूट बंधन का ममत्व
 नाही खोज सका जीवन का सत्व
बस चलता रहा पथ पर
कभी तेज गति से
कभी आहिस्ता आहिस्ता
फिर भी चेतना के सहारे
कर्तव्य को करता रहा
और जब भी आया उम्र का पतझर
एक आशा की किरण
दिखाती रही नई राहें अनस्वर पथ श्लथ
मैं खोजता हूं नए गन्तव्य-कर्म-पथ
लगाता रहा चक्कर
अपनी ही दुनिया के चारों ओर
कोशिश यही रही कि
अन्त तक चलता रहूं अपनी टेढ़ी मेढ़ी राह पर

बैंगलोर
24.02.13





शब्द जागते रहेंगे
शब्द जागते रहेंगे
भले ही अनन्त निद्रा में डूब जाऊं
और बनाते रहेंगे
नए नए रास्ते
दूसरों के लिए
अपनत्व के सम्पूर्ण समर्पण के साथ
बनाऊंगा नया नीड़ नवचेतना-स्नात
अंधकार बीत जाने पर खुलेगा चेतना का द्वार
जब होगा नया प्रभात, दिगन्त के आर-पार
प्रकाश का अधिकार।


बैंगलोर
25.02.13






There are so many things
in this world
which are neglected
and ignored
but are key link to all
for happyness to mankind
and reasons for victory & fall
self consceousness and
adoptation of inner self
in all work-vision
and ombition.









Thursday, 7 March 2013

समय-मौसम-बेमौसम

तुम्हें कैसे समझाऊं
कि जब मैंने समय की प्रतीक्षा की
तो वह दबे पांव गुजर गया
आहिस्ता आहिस्ता
ठीक मेरी आंखों के सामने

और फिर जब
भयाक्रांत अस्तित्व की सुरक्षा में लगा था
तो वह तेजी के साथ गुजर गया
ठीक मेरी पीठ पीछे
और तब मैंने गहरे मन से अतीत को याद किया
कि यह जीवन यूं ही जिया
पर तब मेरा समय
अपनी लघुता में खो गए

जब मैंने प्रतीक्षा के बन्धन
निर्ममता से तोड़ दिया
छोड़ दिए बनाना असित्तव के सुरक्षा-सेतु
तब समय बहुत बड़ा हो गए
और मैं लघुतम..

आखिर तुम्हें कैसे समझाऊं
समय, प्रेम और सपने से
कितना बलवान होता है

कलकत्ता
27 जुलाई, 1975






Time-In Season and out of season

How to explain it to you
that when I waited for time
It passed stealthily away with silent steps
slowly and slowly before my eyes

And when I was busy in
protecting my fear-striken life
the time passed away hurriedly
just behind my back

And then I remembered deeply
my past and thought of my life
that I lived purposelessly...
then my time was lost in its insignificant trivial.
I snapped it cruelly

The bondage of waiting
self building dams for protecting life
then time turned into a tide

How to explain it to you
that time is at last stronger
than love and fantasy
howsoever absorbing it maybe!

Calcutta
27th July, 1975







समय-गति

समय चलता है
कभी तेज, कभी सरपट
कभी शिशु की
पग-बंध गति से
चलता है ठुमुक-ठुमुक कर
आगे बढ़ता
अपने इर्द गिर्द ओढ़े
ढेर सारा वर्तमान अंधेरा-उजाला
अपने ही इताहस में पलता है
समय चलता है।
कोई भी देख सके तो देखे
शिशु की प्रथम पग-गति में बंधा
जीवन
अतीत
वर्तमान
और भविष्य
सपने सजाने का बेहिसाब सिलसिला
और यह क्रम
क्षण प्रतिक्षण बदलता
समय चलता।
चलना ही समय है
और ठहरने शून्यता है, अंधेरापन है
मरण है
समय ही हमें सिखाता है
सृष्टि-कर्म के नए-नए अन्वेषण
और यह भी कि
मनुष्य जब भी अभिलाषाओं के सेतु
निर्माम करताहै
तो उसकी मह्तवाकांक्षा का आधार
समय के बीच ही ढलता है
समय अहर्निश अबाध गति चलता है
और हम उसके बहुत पीछे
छूट जाते हैं।
आगे नहीं चल पाते
तो जीवन में अंधेरा लाते हैं।

पूना,
4 सितम्बर, 1992






Time's Course of Events

Time moves on and on..
nose-gallops
now and then with measured steps and sometimes
like a child gracefully walking in slow paces
But it ever goes on freely
surrounded by light and darkness
nurtured by its own past
time moves on and on..
who ever can visualise
must see that time is fastened
with the first steps of childhood
past life, present and future,
It sets dreams in order consecutively
and this chair changes every moment
time moves on and on imperceptibly...
moving is time, resting,
The isolation and death
time also teaces Nature's new settings
Novel attempts on discoverly
And also that when ever humans
build new bridges on wishes
and their base ambition is everse
moulded within Time's frame
Time moves day and night incessantly
and we lag far behind
can't move with it
And fill our life with ultimate darkness.

Pune,
4 Sept. 1992

Wednesday, 6 March 2013

परम्परा

हमने वही किया
जो दूसरों ने किया
हमने वही जिया
जो दूसरों ने जिया
हमने वही दिया
जो दूसरों ने दिया
उन्होंने वही दूरियां तय की
और हमने की
अन्तर यही है
कि उन्होने जिस फल को फेंक दिया था
उसे हमने अपने लिए उठा लिया।

कलकत्ता,
23 जनवरी 1987






Traditions
We did what others did
we lived what others lived
we gave what others gave
we covered the same distances
what they didi cover
But there is a difference ;
The fruit which they discarded
We've grasped it for us!..

Calcutta, 
23rd Jan. 1987






जीवन छन्द

गाओ गाओ जीवन के छन्द
समय के पीछे समय का पहिया चलता
और इसी तरह मौसम और वर्ष और
शताब्दियां अनन्त
आदमी के बाद आदमी हताशा के कोहरे में
लिपटा आशा का नया सूरज
दुःख के बाद ही होता सुख का उदय।

एक इतिहास के बाद दूसरा इतिहास
एक सुबह के बाद दूसरी सुबह
कितनी ही और इसी तरह कई कई सुबहें बदलती
कितनी ही कई कई बार
कितने ही कई कई रंगों में बंटता पूर्वाकाश
पूरब से पश्चिम-
उत्तर से दक्षिण
दूरियों में बंटे लोग
लोगों में बंटे लोग
दिशाहीनता, षडयंत्र, द्वन्द के बीच
गाओ गाओ नव-जीवन के छन्द।


ऋषिकेश,
15 अगस्त, 1971






Songs of life
Sigh, sing songs of life
time is running like a
wheel within a wheel, and
likewise, seasons, years
and centuries innumerable.
Humans one after another move on
The new sun of hope rises
out of mist of frustrations
and so happiness comes after miseries,

Passing on history comes after another
One morning after the other
things go on and
The next morning
at the eastern sky divides itself in many a hues
People devide into the east and the west
The north and the south create many a distances
aimlessness, conspiracy, strife
reign among them, still evaporate
And yet they sing and sing songs of life-
keeping undying vitality forever...

Rishikesh
15th Aug., 1971





समय-असमय

जीवन के अस्तित्व में गतिमान-समय की रेत
मुट्ठियों से निरन्तर झरती जाती
उफनती, उद्वेलित सागर की लहरें कहतीं
वर्तमान का ऊबड़-खाबड़, उच्छिष्ट...
हृदय का खालीपन नहीं भरता
स्मृतियों का शैलाब उठता मन में
और अनिर्दिष्ट अपरिचित दिशान्त की ओर
मन को बहा ले जाता
फिर नया विश्वास
नई प्रतिज्ञाओं से जीवन सजाता
समय के साथ नया नाता जोड़ता
नए नए छन्द, समवेत ऋतु गान सजाता
किन्तु असमय-समय-पतझर-सा
कल्पना का रेत-घर ढहाता
अन्ततः सर्जक ही
रिक्त-मन में
नये भाव-बोध सजाता
दे जाता नई थाती
प्रारब्ध की संचित रेत
क्रियामाण कर्म की मुट्ठियों से
झरती जाती।


कलकत्ता,
21 जनवरी, 1999






Time-Proper and Imporper?
The ever moving sand of time
perpetually slipping away from
the closed fist, and the swirling
agitated waves of the ocean tell us
The present is just an unfulfilled left over
relic all refuse, remnant of visuals..
The void of heart is never filled up with it
The moss of memories rises in mind
its impatience thrust us
towards directionless unknown aims..
Once again, new faith decorates
life with resolutions and vows
new relations,
New verses create
new seasonal songs
But time and again sand castles
are dispersed and scattered on the beach
That create in the vacant mind a vaccum
Fills up new sensitivities
gives new pledges
The sands of the original and stored up actions
slip away from our gripping fists.

Calcutta
21st January, 1999




Tuesday, 5 March 2013

समय और सौंदर्य

सौंदर्य का सबसे बड़ा शत्रु समय है
और समय ही सौन्दर्य का उपासक भी है
सौंदर्य को नये ढंग से
समय बनाने बिगाड़ने में लगा रहता है
समय जीवन के लिए सत्य की परिभाषा है
सौंदर्य हृदय की भाषा है
वह नये-नये अर्थ देता सत्य को
समय से अधिक
हृदय के करीब
हृदय से
सौंदर्य की पहचान होती
समय और सौंदर्य
कभी किसी की प्रतीक्षा नहीं करते
समय अबाध-गति से चलता है निरन्तर,
सौंदर्य समय के साथ ही ढलता है निःस्वर।

हैदराबाद,
20जनवरी, 1992



Beauty & Time

Beauty's eternal enemy is time
Time also is beauty's devotee
votary or worshiper,
say whatever, you like..
beauty is created and damaged,
raised and ruined by time
for life, time is it's definition
beauty is the heart's language
that provides evergreen meanings
to truly, more than the time can.
Beauty is dearest to hearts everywhere
Time identifies and recognise beauty
beauty and time never wait
for any one, anything, anywhere
time moves on non stop incessantly
beauty fades away with the time
without a murmur constantly

Hyderabad, 
20th Jan, 1992





जीवन
जिन्दगी, कुछ कट गई जीवन को सजाने में
और कुछ कट गई प्रेम के बहकाने में
कुछ और भी कट जाएगी जीते रहने की यात्रा
अपना ही शव कंधे पर उठाने में........

कोलकाता
27 अप्रैल, 1999






Life

Some of the life is spent in its presentations
some is gone in love's inducements
some is to pass in living its span
or, carrying our own carcass on our
shoulders....



Hyderabad, 
20th Jan, 1992








युग - छन्द

चलो हम एक बार फिर जड़ता की गांठें खोले
हृदय की भाषा बोलें
संबंधों को तोलें।

शहर से सिवान की ओर चलें
खेतों खलिहानों में
खेतिहर के दुःख को अपना मानें
या, बाढ़, अकाल ग्रस्त शश्य-श्यामला की गीली सूखी पीड़ा सहें।

चलो संप्रीति का नया अर्थ गढ़ें
घृणा के घावों को आत्मीयता से भरे
मानवता (मनुष्यता) के लिए जियें और मरे
भले ही पतझर के पीले पत्ते बन झरें

चलो नए प्राण-संवेदन
नये नये छन्दों से अभिव्यक्ति के घरौंदे सजाएं
सोए हुए सपनों को फिर से जगाएं
अपने ही लिए नहीं सत्य (समष्टि) के लिए समवेत गीत गाएं

चलो भग्न-हृदयों को फिर से जोड़ें
जो भटकें हैं उन्हें नई राहों की ओर मोड़ें

अवरोध-सेतु तोड़े
नये को नये से जोड़ें।

चेन्नई
1 फरवरी, 1992








Poesy of Times

Come, once again, let us, dear ones,
untie the knots of indurate insensibillity,
Speak the language of heart
Balanced with the relationship of heart warming intimacy

Come let's move to the boundary
of township towards fields and greenary
Feel the peasant's troubles as our own
Sense the dry or wet part
of ever-green fertile land in
times of famines and floods.

Come let's discover new
meanings of our affections
heal up wounds of heatred
with alliances, friendships
live and die for humanity's sake
may even fall like yellow leaves of the Autumn
from time's tree
come, let's express ourselves
in making small homes with ever-fresh
vital sensitivity in newer verses
awake up with the dormant dreams once again
not for us alone but for all the humanity
sing psalms in unison..

come, let's unite the broken hearts
bring back the wayward to new paths
destroy impeding barrages
to creatate amity and admiration
among the up coming generations



Chennai
1 Feb., 1992






अतीत से टूटना

अतीत को
याद करना कितना कठिन होता है
कितना कष्टर होता है
अतीत के बंधन से
स्मृतियों की छाया को मुक्त कर पाना
कितना दुष्कर होता है
जीवन के नए सिरे से जीना
अतीत का प्रभामंडल तोड़ना
पुराने संबंध छोड़कर
नयों से मन जोड़ना

कोलकाता
10 जनवरी, 2000






Break with the Past

Yes, how heard it is
To break away with the past
How painful it is indeed
to be free from
the shackels of the bygone days
and liberate onesef from the shadwos of memories.

How difficult it is
to start from a new end of life
Breaking the halo of the past
of the so-called 'Goden Era'
Leaving behind old relationships
and uniting with the new ones.


Calcutta
10th Jan, 2000