Monday, 28 January 2013

प्रिय पाठकगण

मैं अपने प्रिय पाठकों, ब्लॉग-मित्रों, सदस्यों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं भेजता हूं तथा अवगत कराना चाहता हूं कि ब्लॉग - फेसबुक पर मैंने 1 जनवरी 2012 से लेकर 31 दिसम्बर 2012 तक की प्रतिदिन लिखी कविताएं प्रकाशित की है। मित्रों ने यह लिखकर मुझे प्रोत्साहित किया है कि इस प्रकार का प्रयास विश्व के साहित्य मंच पर घटित प्रथम रचनात्मक घटना है। मुझे प्रसन्नता है कि मेरे छोटे प्रयास को हिन्दी साहित्य के पाठकों ने ग्रहण किया।

मैं वर्ष 2013 से उत्तर महाभारतम् महाकाव्य पर कार्य कर रहा हूं जिसे इसी वर्ष पूरा करने का प्रयास करूंगा। अतः ब्लॉग पर अब अन्य साहित्य विधाओं पर विचार-संस्कार, लेखन कभी-कभी ही प्रस्तुत करूंगा। मैं अपने प्रिय पाठकों को धन्यवाद देता हूं और अनुरोध करता हूं कि मेरे साथ बने रहें।

                                                                                                        - स्वदेश भारती


Dear Readers, Blog-Friends, Members happy and most prosperous New Year to you and inform that in 2012 I have written on my Blgo everyday poems which was accepted and rejoiced. This has given me strength & encouragement. This is the first instance in literary History. I am happy the Hindi Poetry lovers have liked my work. since 2013 I have started writing 'Uttar Mahabharatam' and therefore daily poetry writing on Blog is not possible.

I thank my readers and request them to be with me and my writing.
                                                                                                      - Swadesh Bharati

Sunday, 6 January 2013

बदलाव

आजादी के बाद भारतीय प्रशासनिक एवं सामाजिक व्यवस्था लोगों को मानसिकता में बदलाव होना जरूरी था। इस सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पक्ष को राजनेताओं ने गम्भीरता के साथ नहीं लिया। राजनीति के दलदल में फंसकर लोभ, लाभी सत्ताधारियों का सत्ता में बने रहने के लिए वोट बैंक बनाने को तिकड़म, बाहुबलियों, अत्याचारियों हत्यारों को पैदा करने, उन्हें संरक्षण प्रदान करने का सिलसिला चला जिससे जनतंत्र कलंकित हो रहा है। कर्तव्यहीन एवं भ्रष्ट पुलिस और प्रशासन की स्वच्छन्दता के कारण भारतीय समाज व्यवस्था विखर गई है। आज के माहौल में सबसे पहले प्रशासन, पुलिस और राजनेता के बुद्धि की शुद्धि होना जरूरी है। इसके लिए सरकार को कड़े कानून बनाने होंगे। संसद को अंग्रेजों के जमाने का भारतीय दंड-विधान (आईपीसी) को बदलना होगा। पुलिस और प्रशासन की सम्पूर्ण कार्यप्रणाली को जनता की भलाई के लिए प्रतिबद्ध तरीके से चुस्त दुरुस्त करना होगा। लोगों की मानसिकता में बदलाव आना जरूरी है। कोई भी किसी तरह का पाप, अत्याचार, शोषण, आमजन, स्त्रियों का शोषण, बलात्कार, हत्या चरित्र हनन आदि अपराधों को पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य-संगठन, अस्पताल प्रमुखता के साथ तुरंत कार्रवाई करें। उनके कार्य की देखरेख के लिए गांवों, शहरों में निष्पक्ष, तटस्थ जन-सेवा-संस्थान हों जिनमें राजनीतिज्ञ न हों, सामान्य जनता, समाज के प्रतिनिधि हों। कानून में बदलाव हो, बलात्कारी को तुरन्त फांसी की सजा दी जाए। पुलिस तथा भारतीय जन प्रशासन में रिक्रूटों को भारतीय सामाजिकता, दंडविधान, जन-सेवा की सघन ट्रेनिंग दी जाए। मीडिया, फिल्मों में हत्याओं, अश्लील दृश्यों, खबरों पर रोक लगाई जाए। चरित्रहीन बलात्कारी, चोर, हत्यारे, बाहुलियों को पंचायत विधानसभा, राज्यसभा लोकसभा में जाने पर रोक लगे। चुनाव आयोग इस पर कड़ी कार्रवाई करें।

शिक्षा  को राजनीति के चंगुल से छुड़ाया जाए। शिक्षण संस्थानों में छात्रों की यूनियन, संघ, परिषद आदि भंग किए जाएं। स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, तकनीकी शिक्षण संस्थाओं में कड़ी अनुशासन प्रक्रिया के मानदंड बनाए जाएं और उन पर अमल किया जाए। बेसिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक शिक्षण संस्थानों में समाज शास्त्र आवश्यक विषय हो और परीक्षा-प्रश्न पत्र में उत्तीर्ण होने के लिए अधिकतम अंक पर पास और फेल की प्रक्रिया निर्धारित हो। यही जनसेवा परीक्षाओं में भी हो।

मीडिया में समाज की जिम्मेदारियों पर लगातार पैनल चर्चा आयोजित की जाए।

अतः देश में सम्पूर्ण बदलाव के लिए पुलिस, प्रशासन, शिक्षा, मीडिया की सोच और कार्य प्रणाली में बदलाव जरूरी है।
                                                                                                                             - स्वदेश भारती




The Change

After Independence, change in political and Social thinking was essential but we failed that. Vote Politics has come up above all the National problems.

Untrained, unethical, crupt  selfish, responsible Police- incompetent corrupt administration and egoist vote-looter antisocial so called leaders have made the country a Jungle full of cheat Vote Bankers, Criminals, rapists, murderers, antisocial elements. Now the country needs a big change social awareness in the need of the hour. Election commission should not give permission to antisocial, rapist, murders, muscle powers to fight any election like Panchayat, Vidhan Sabha, Rajya Sabha, Lok Sabha etc.

All sort of unions in Schools, Colleges, Universities should be totally baned and strict discipling maintained. Every institution from IAS, IPS etc. Social Science study should be made compulsory. The films and media should not show the Scenes of extreme glamour, Rape, murders etc. The should maintain social responsibility.

Tuesday, 1 January 2013

प्रतिज्ञाएं

जो प्रतिज्ञाएं की थी
पिछले वर्ष
वे सब पूरी नहीं हुई
जीवन को घेरे रहा आत्म-विमर्ष
अब आएगा नववर्ष
कितना दे पाएगा हर्ष और उत्कर्ष

                                            28 दिसम्बर, 2012




शब्दों की नाव

शब्दों की नाव बनाई
और छोड़ दिया उसे चेतना-प्रवाह में
समय-सागर की तूफानी उताल लहरों के बीच
संघर्षों से भरा रहा वर्ष
आए अनेकों अवरोध कंटकाकीरअम राह में
कितने सारे अवरोध-विरोध आए
पग-पग पर आहत हुआ उत्कर्ष।

                                                       29 दिसम्बर, 2012








सपनों का संसार

सपने तो सभी गढ़ते हैं
उसी तरह मेरे भीतर भी सपने पलते रहे
उन्हें पाने के लिए
राह में पग-श्लथ संघर्षशील चलते रहे
सपने मांगते हैं निष्ठा और कर्म का कवच
जिससे अपने का सुरक्षित रखते हुए
असमय-युद्ध में लड़ते हुए
मंजिल की ओर बढ़ते रहें
सपनों को साकार करते रहे
नये नये भाव चित्र गढ़ते रहे।

                                                   30  दिसम्बर, 2012








सुनहरी किरण

ओ सुनहरी किरण
तुमने जिस तरह दिन प्रतिदिन
रात का अंधकार दूर किया
नई आकांक्षाओं, प्रतिक्षाओं और
कर्म के विविध आयामों को सर्जित किया
उनके आलोक में ही तो मैं
युद्ध-रत पथ-श्लथ अब तक जिया
जैसा नियति ने हलाहल दिया
उसे ही अमृत मानकर पिया

ओ सुनहरी शब्द-किरण
तुम जिस तरह प्रभात वेला में
आत्मसंवेदना के सप्तरंगी-खेला में
प्राण-आकाश पथ पर आती हो
चेतना को जागृत करती हो
एक नव्य-प्रभा भर जाती हो
और नित्य प्रति संवेदित कर जाती हो
एकाकी हिया।

  31  दिसम्बर, 2012