Tuesday, 31 December 2013

विश्रृंखला के बीच

आज तो हर ओर शोर है
हर ओर उत्श्रंखल शोर
नई-नई दावेदारी की आवाजें जुड़ जातीं
तनावग्रस्त चीखती चिल्लाती
दिन में भी ऐसा अंधकार छा जाता
समझ में नहीं आता रात है या भोर
हर आदमी के सपने आहत हैं
उसका पथ रक्तरंजित है
लोभलाभी समय स्वार्थी राजनीति के कंधों पर
अपनी प्रत्यंचा ताने
आम जन का शिकार करने के लिए उद्यत है
राजनीति हर तरह से
आजमाती है अपना जोर...

आखिर यह सिलसिला कब तक चलेगा
असहाय आमजन
कब तक अपना हाथ मलेगा,
अभावग्रस्त चिर-प्रगाढ़ निद्रा में सो जाएगा
इसी अमोघ निंद्रा, असमर्थता, किंकर्तव्यविमूढ़ता के तई
हम सदियों तक पराधीन रहे
ईरानी, अरबी, अफगान, मंगोल, मुगल
घोड़ों के टापों से हमारी अस्मिता रौंदते रहे
हमारी संस्कृति को पद दलित करते रहे
और बन गए शहंशाह
हम रह गए अघोर
आज भी पूरी आजादी के लिए उठ रहा शोर

                                 कोलकाता,
                                 22 अप्रैल, 2013







चलो बांधे नाव को उस पार वन्धु

चलो बांधे नाव को उस पार बन्धु
हृदय-सागर के किनारे
आत्ममन - विश्वास से बनी सुन्दर, सौम्य, सुखकर
भाव-श्रद्धा, संप्रीति रचित तटनी को चलाएं
समय की उत्ताल लहरों में मन की सधी
पतवार नियंत्रित कर
नहीं माने हार वन्धु
हृदय की उत्ताल लहरों से प्रकपित
जब भी नाव डगमग डोलती
खोलती अनबूझ अंतर व्यथा- कथा
सहती आलोड़न
चलती मौन के मझधार में अतिशय तरंगित
आत्म बल का बोझ लादे
और ला दे तीव्र अभिलाषा कि
पहुंचे सिन्धु के उस पार
काटे प्रीति की मझधार वन्धु
चलो बांधे नाव को उस पार वन्धु


                                 कोलकाता,
                                 24 अप्रैल, 2013





 चेतना की धार

चेतना की धार प्रवाहित होती पहले सीधे
फिर दाएं बाएं घूमती हुई
मन की रेत को जहां तहां बहा ले जाती
फिर कई अंतर्रधाराएं जन्म लेती
मस्तिष्क ग्लेशियर से गर्वोन्नत कल कल
छल छल गिरती हैं छन्दबद्ध अथवा छन्द विच्यूत
धार कई कई रूपों में प्रवाहित होती
वृहत्तर प्राण-शोक सर्जित करती
जल से तृप्त करती बिनारीते
उकेरती नव-बीज, स्फुरित करती
धन्य-धान्य भरा भू-गर्भा
हरित भरित कर प्राण में नवप्राण जोड़ती नवनीत...
मानव चेतना की घास कभी सूखती नहीं, न मिटती
समय परिवर्तन के साथ साथ
नव चेतना की धार अपनी दिशा बदलती
जीवन को हरिताम्बरा करती
नए-नए सुख-उष्मा से भरती
चेतना की धार प्रवाहित होती आत्मगत सीधे
मन संप्रीति का सेतु तोड़
इसी तरह कई कई युग बीते।


                                   कोलकाता,
                                   26 अप्रैल, 2013






शब्द और छन्द

मैं शब्द बनू और तुम छन्द
मैं बनू मधुप रस पराग रंजित
पंखुड़ियों में बन्द
तुम बनो रसराज बसन्त की कली
खिली खिली, मधुमादित माधुर्य, मोद भरी निरानंद
किन्तु समय होता बहुत बड़ा छली
जो पतझर बनकर अपने हाथों में
तूफान, चक्रवात लेकर आता
हमारे सपने चूर-चूर कर जाता
और मैं शब्द बनते बनते छन्द बन जाता हूं।

                                          कोलकाता,
                                        27 अप्रैल, 2013






वर्ष का अंतिम दिवस

वर्ष का अंतिम दिवस
कुछ इस तरह पैगाम लाया
दर्दमय था दौर सुख का
प्राण-दंशित और घातक
आत्म-पीड़क- दंड दुख का
वही सब प्रारब्ध में था
उसी में यह वर्ष बीता

प्राण-अंर्तद्वन्द में
चेतना के छन्द में
कामना के भग्न तारों पर
ध्वनित अनुराग
अन्तर-राग में
निस्सार वन यह वर्ष बीता

जो नियति में नियत था
बस वही पाया, उसे ही मन में संजोया
जो नहीं था, उसे खोया
वर्ष का अन्तिम दिवस
कुछ इस तरह पैगाम लाया
सार्थक है वही जो जितना जिया
साल का अंतिम दिवस
बस, अलविदा कह चल दिया

                                        कोलकाता,
                                       31 दिसम्बर, 2013

कविता - वर्ष 2013

वर्ष 2013 में प्रतिदिन लिखी कविताओं में से कुछ कविताएं अपने प्रिय पाठकों, मित्रों के लिए फेस बुक में उद्धृत हैं जिनमें वर्ष की अन्तिम कविता भी शामिल है
कविताएं हार्दिक शुभकानाओं सहित नव वर्ष के उपहार स्वरूप  प्रस्तुत है।
                                                                                                   - स्वदेश भारती


सोनाली फसल का अर्थ
सारा गांव फसल पकते ही
आनन्दोत्सव में मग्न हो जाता है
उसे पता होता है कि कितना धान (चावल) या गेहूं,
तिलहन, कितनी दाल मिल सकती है
खाने के लिए अन्न की कमी नहीं होगी
बागों में अमराई बौराती
कई कई पेड़ों में नन्हें नन्हें टिकोरे लगते
सूर्योदय की सतरंगी किरणों में
पके गेहूं की बालियां स्वर्णिम
चमकदार हो जाती
पूर्व क्षितिज की लोहित लावण्यभरी लालिमा
और दूर तक फैली सोनाली फसल
मन को अनजाने सुख-सौन्दर्य से भर जाती है
मैं गेहूं के खेत के मेंड पर उगी
हरी घास पर बैठा किसान के परिश्रम से पकी फसल
और प्रकृति का नैसर्गिक, सौन्दर्य देखकर
अनुमान लगा रहा हूं
सारे देश के परिश्रम से ही जन जन की भूख
और किसानों की अभावग्रस्तता, दुर्भिक्षता के विरुद्ध
सत्ता की बैसाखियों को परे हटाकर
स्वच्छन्द जिन्दगी जीने को मिलती है
टूटी फूटी झोपड़ी में कंडी के उठते धुएं के बीच
तवे पर रोटी पकती है
भूखे, नंगे बच्चों के कुम्हलाए मुख पर
खुशी की कली खिलती है।

                                                    झाउ का पुरवा (प्रतापगढ़)
                                                    2 अप्रैल, 2013







मनुष्य की चाहत

मनुष्य की चाहत अनन्त है
उसी चाहत की डोर पकड़
वह चढ़ना चाहता है सातवें आसमान पर
बाहों में आकांक्षाएं भर
और यही चाहत बनती
लोभ, मोह, क्षोभ, जय-विजय, प्रेम-अप्रेम
लाभ-हानि, सुख-दुख की जड़....

यही चाहत ही सबसे अधिक बलवंत है
सत्ता की कुर्सी चीखकर कहती है
अधिक चाहत, सर्वोपरि आकांक्षा, हंसी, शोक
मन में मत पालो
सुखी हो इहलोक, तब परलोक
पहले फैलाओ जन-जन में आलोक
सभी हों सुखी, स्वस्थ, धन-धान्य भरा
हरीतिमा, सुषमा, फूलों, फलों से भरी हो
हमारी शाश्वत माता वसुन्धरा
नियंत्रित करो चाहत समष्टि के लिए
मजबूत करो अपनी जड़
 कदम दर कदम आगे बढ़

                                                     झाउ का पुरवा (प्रतापगढ़)
                                                    3 अप्रैल, 2013





सम्बन्धों की प्रवंचना

एक छद्म आवरण ओढ़े हैं
प्रत्येक आदमी और
कितनी तरह से संप्रीति की
गाढे बांधकर
सम्बन्धों को जोड़े हैं
फिर भी कहता
यह प्रवंचना थोड़े हैं।

                                                      झाउ का पुरवा (प्रतापगढ़)
                                                     4 अप्रैल, 2013








गांव-गिरांव फटेहाल

सबेरे की पीली धूप चैत्र मास की
मृदुल, मृदुल उष्मा ठंडी हवा के थिरकत्ते पांव
पकी गेहूं की सोनाली फसल
नृत्य करते एक हृदय ग्राही दृश्य उपस्थित करते
पल्लि पथ पर गायों, भैंसों का रंभाना
चारागाह की ओर प्रसन्नचित्त जाना
हृदय को पृथ्वी धन और पशुधन के
विविध रूपों से भरता है
चरवाहा गाता है चौताल बिरहा
कान पर हाथ रखकर
जैसे उससे बड़ा-गवैया संसार में कोई नहीं
फूटते हैं लाल टेसू कहीं कहीं
अर्पित करता अपना रस भरा फूल
मन्दिर में देवी भवानी को अर्पित किए जल को
पीता गांव का भूखा झबरैला-टामी
जो रात भर घरों की रखवाली करता
और किसी कूड़े की ढेर में दुबक कर सो जाता
गांव में बसते गरीब अमीर नामी गिरामी
किन्तु सभी एक दूसरे को टेढी आंखों से देखते
यह विसंगति मन को आहत करती
और यह संकेत देती कि
आजादी के पैंसठ साल बाद भी नहीं हुआ विकास
और गांव का सिवान करता रहा अट्ठास।

                                                       झाउ का पुरवा (प्रतापगढ़)
                                                       9 अप्रैल, 2013




ईश्वर के अधीन

न जाने क्यों ईश्वर ने
पृथ्वी बनाई विशाल और सुन्दर
फिर उसे दिया असीमित
मनोरम सौंदर्य शुष्मा हरीतिमा
तरह-तरह के पेड़, पौधों से रचे सघन जंगल
बर्फाच्छादित पर्वत-शिखर, बादल
नदिया, सागर
बनाए किसिम-किसिम के फूल, पौधे,
धनधान्य भरे खेत, बाग, गांव, नगर
बनाये उसने स्त्री, पुरुष,
विविध दुग्धधारी पशु,
रंग विरंगे पक्षी सुन्दर
दिए मानव को ज्ञान प्रखर
विज्ञान, कला से भरा जीवन
आनन्द, संप्रीति-स्फुरण
और दिए उपादान सुख, शान्ति का वरण
किन्तु ईश्वर ने क्यों दिए
मानव को लोभ, लिप्सा, आकांक्षा, अहंकार
काम, क्रोध, भोग-संचरण
क्यों दिए ईश्वर ने मनुष्य को
वासना, हिंसा, प्रतिहिंसा, पिपासा
सत्ता दोहन, दासता-जन्य परिभाषा
क्यों दिए तरह-तरह के विनाशक अस्त्र
क्यों दिए अमीरी, गरीबी, आशा दुराशा
क्यों दिए देव, मानव, दानव में
विनाश की प्रवृत्ति, आत्मक्षरण
कि एक समय हो जाएगा सर्वस्व इति
क्यों बनाए ऐसी दुनिया हे विश्वम्भर
इतनी सुन्दर प्रकृति...।

                                                        झाउ का पुरवा (प्रतापगढ़)
                                                       10 अप्रैल, 2013






गन्तव्य पथ के बीच

गन्तव्य पथ पर चलता रहा
आपद-तूफान, वर्षा, झंझावात के बीच
अपने विश्वास
और आस्था को
मन-मस्तिष्क से भींच
चलता रहा
वह जो सपना था मन के भीतर
नए नए रूपों में पलता रहा
सभी के हमारे अन्तस में सम्बन्धों की राख में
एक द्युतिमान चिन्गारी छिपी होती है
जो समय असमय जलती है धू धूकर
इस तरह हठात जलती है तो कुछ न कुछ
विध्वंस होता ही है
कभी आग सार्थक होती है
तो कभी निरर्थक होकर
जलाती है मन-मस्तिष्क निःस्वर
मैं भी उस आग में जलता रहा
और गन्तव्य-पथ पर चलता रहा
कभी-कभी ऐसा भी होता आया
कि अजाने सुख ने रोमांच दिया
सुखा डाला सोच की हरियाली को दुःख ने
और उसे ही प्रारब्ध का छोटा अंश मान लिया
नए-नए क्षितिजों में चलने की चाह से
मन का आइस वर्ग पिघलता रहा
मैं अपने गन्तव्य-पथ पर चलता रहा।

                                                       उत्तरायण (कोलकाता)
                                                       20 अप्रैल, 2013

Monday, 30 December 2013

आदमी-औरत

आदमी ने कहा - आओ चलें आगे और आगे
औरत ने कहा- हां चलो पर थोड़ा सुस्ता लें
नदी किनारे, पर्वत की छांव में
सागर-तट पर, वसन्त-कानन में।

आदमी ने कहा - आओ चलें आगे और आगे
औरत ने कहा - पहले जीवन के उन मधुर क्षणों को,
अपनी आकांक्षाओं को मन से बांध लें
और यह देख लें कि कलियां भी
फूलती हैं किसी न किसी प्राप्य की इच्छा लिए
जो ऐसा नहीं करतीं, वही असमय कुम्हला कर
वृन्त-विहीन हो जाती हैं
जो समय की ताल पर
नाचती हैं
यही समझ लो कि उनके भी
अभिराम स्वप्न जागते हैं
आदमी ने कहा- आओ चलें आगे और आगे
औरत ने कहा- आह मर्द क्यों नहीं समझ पाते औरत के
अन्तस में धधकते अंगारे, अन्तर-निहित रहस्य, कामनाएं
और उनके दायरे।

कलकत्ता,
8 अप्रैल, 1992






Man and Woman (A Dialogue)

Man- Let's go on and on
Woman-Yes, but let it be so after resting
by the river side for a while
in the shadow of the mountain, on the sea-beach,
In this forest during the Spring
Man-come on let's go on and on
Woman-First, let us recollect life's sweet moments
And our cherished desires floating in the mind
And realize that blossom turn into flowers and fruits
with some purposes and times
which fail in this process
fade, wither, shriven or lose their luster
Before the time of existence
Those which dance on the tune of rhythmic tune
They weave their dreams
Man-come let's go on and on
Woman-oh! men don't understand the burning
mystic desire's tussles in
The various inner beings of women,
their mysteries and their spheres of influence.

Calcutta
8th April, 1982




समय-संदर्भ

चुपचाप बीत जाती रात
और उजाले से स्नान किया हुआ प्रभात
अपनी शुभ्र कांति-देह पर
भीड़ भरी दिन-चर्चाओं का आवरण ओढ़े
चलता है
जीवन-प्रक्रिया भीड़ के साथ
चुपचाप चुपचाप बीत जाती रात
और इसी तरह हमारे सपने भी
अपनी गठरी से स्मृतियों के एक-एक चीथड़े निकालते हैं
भीड़ भरी आशाओं के फुटपाथ पर
दुकान सजाते हैं
और अपने मोल-भाव की कुशलता से
कुछ न कुछ लाभ उठाते हैं
घाटा सहते हैं
अंधकार घिरने के साथ-साथ
मालपत्र सहेज कर
इच्छाओं की सन्दूक में रखते हैं
सहते हल्ला-गाड़ी-समय का घात-प्रतिघात
चुपचाप चुपचाप बीत जाती रात
उफनता रहता समुद्र
लहरों की हथेलियों पर लिखता जाता
अनगिन शब्द-गीत छन्द
मौसम बदलते तेजी के साथ अपने रास्ते
नदियां बदलती प्रवाह
और बर्फाच्छादित पर्वत पर
अचानक ही लग जाती आग
अभिलाषा के अलिंगन हो जाते
कमल कोरकों में बन्द
और ऐसे ही बीत जाती मनुष्य की
संघर्षरत अंधेरी रात
चुपचाप चुपचाप

कलकत्ता,
22 मई,1992






In the Context of Time...

The night passes quietly, silently
And the dawn washed in the sunlight
Covered with crowded news moves on with
it's brilliant figure within
The crowded process of existence forward...
The night passes silently.
Likewise, our dreams bring out the truth
rags of reminiscences one by one
lay out their makeshift shops on
crowded foot-paths
and despite with their lust of regaining
make some profit, losses, more or less
and as darkness sets in they endure
the police action to clear foot-path
Before the goods are boxed
in desire's go downs
the night passes quietly
The sea surges & swells on writing
count, lyrics verses-stanzas on
The palms of waves;
The seasons change
imperceptible, swiftly on their own
even the rivers change their courses.
the snow-clad mountains are fired suddenly
And the black bees are confined in lotus buds
likewise, dark nights of struggling humans
passes on quietly....

Calcutta
22nd May, 1992.

Sunday, 29 December 2013

सुख और दुख

क्या सुख मिला- उसने कहा- हां
क्या दुःख मिला- उसने कहा-हां
फिर एक मौन छा गया
न प्रश्न ने उत्तर की अपेक्षा की
न उत्तर ने अगले प्रश्न की
दोनों ने हाथ मिला लिए
फिर उन्हें नागफनी के जंगल से गुजरते समय
एक काला नाग मिला
दोनों ठिठक गए
चिन्तन-मन्थन करते रहे
आगे की यात्रा के नये-नये पथ-विधान गढ़ते रहे
एक ने कहा
सुख में कांटे होते हैं
दूजे ने कहा
दुःख में कांटे ही काटे होते हैं
दोनों ने एक स्वर में कहा
सुख और दुख दोनों में कांटे होते हैं
इसलिए पहले कांटेदार जंगल को पार करना है
फिर नदी के उस पार पहुंचना है
तभी डाल पर बैठी मैना बोली
दुःख और सुख के परे भी
एक ऐसी स्थिति होती है
जहां मन निरानंदित होता है
कभी दुख, सुख को
और कभी सुख, दुख को
अपने कंधे पर ढोता है,

न्यू सिक्किम हाउस, नई दिल्ली
21 मार्च, 1992





Pleasure and Pain

Tranquilly Tranquilly and anxiety
Comforts and misery
Happiness, glory and doubt
Could you get any of these

Both respectively got
their replies in Yes and No
There was silence, thereafter
neither questions were asked
nor answers given
Both shook hands
Both were passing through the jungle
of prickly pears, cactus
There they met a black serpent
Both stopped a short,
were wavering to go forward
Musing and thinking
they planned their ways to continue their
journey ahead
One said-There are thorns in happiness
The other said-
There are only thorns in unhappiness.

Then they both uttered in unison
life is full of Joy and Sorrows
So let us cross first the thorny jungle
then have to reach the other side of the river quietly
mynah sitting on a branch meanwhile exclaimed
There is a state of experience beyond
both Pleasure and Pain-s state of mind
when and where none
of these apposite are felt. The min's
equanimity is never unbalanced and forever
one goes through any of them without a waver.

New Sikkim House, New Delhi
21st March, 1992




एक पत्रांश

......... तुम किसी एक फूल का नाम लो
निचोड़ों उसे अपने खून में मिलाकर
गिराओ कहीं भी
मेरा नाम नजर आएगा।

मैं फलों की बात नहीं करता
क्योंकि सारी जिन्दगी
गंवा दी फूलों की परिभाषा करते
उनकी पहचान से आत्मसात होने का
दम भरते
तुम किसी भी फूल का नाम लो।

वैसे तो फूल बहुत हैं बाग में
मैंने और तुमने महसूस किये हैं
उनके बीच अपने ही रंगों के छन्द
और रूप-रसगन्ध

पर सच तो यह है
न तुम और न ही मैं
ठीकठीक समझ सके
समय और जीवन में परिवर्तन-द्वन्द
तुम किसी एक फूल का नाम लो
मेरे अन्तस् का रंग जरूर नजर आएगा...

कलकत्ता
16 जून 1979



The part of a letter

You name a flower
squeeze its essence in your blood
and drop somewhere
you'll find my name written there

I don't talk about fruits
because the whole of my life
I wasted in defining the kinds of flowers
and be one with them.

Name a flower.... there're so many
in the garden, you and I feel their meters
the themes of your own colors, forms, fragrance, tastes
But the truth is that
neither you nor I understand well about flowers
The changes in the opposites of life and times
you name a flower and see there
only the color of my inner being shall appear.

Calcutta
16th June, 1979

Saturday, 28 December 2013

वेदना के क्षितिज में

वेदना के क्षितिज में
जब भी समय का सूर्य खिलता
चेतना का द्वार खुलता
प्रीति-आइसवर्ग बनता
चाह-आतुर मन पिघलता
हिरण्य गर्भा धरा का सौन्दर्य ढलता
अनुपम मनोहर रूप का संसार पलता
अंकुरित होता सदा ही प्यार जिसमें
बांध लेते स्नेह-बंधन हृदय को
फिर उसी से नियति का आधार बनता
उसी से ही प्रेरणा का द्वारा खुलता
हर सुखों का वृक्ष फलता

पास रहकर भी समय से दूर रह जाते
सदा संप्रीत बंधन से अलग है दर्द की पीड़ा
वही जो सालती अंतर प्रवंचित तमस जीवन भर
मौन का घिरता कुहाशा
टूटते संबंध की पतवार थामे
मन-तरी को समय के मजधार में
उत्ताल लहरों से बचाते क्या कभी हम
प्राण-तट तक पहुंच पाते पंथ हारा
डोलती डगमग तरी पतवार टूटी
अन्ततः दुख-मौन का अंधियार घिरता
वेदना के क्षितिज में ही प्यार खिलता....

                                     झाऊ का पुरवा, प्रतापगढ़, (उ.प्र.)
                                                30 मार्च, 2013





संभावना के क्षितिज

संभावना के क्षितिज में
उड़ते आकांक्षा-खग दूर-दूर तक
उनके समानान्तर ही मानव
बढ़ाते आहिस्ता-आहिस्ता अथवा तेजगति से कदम
कर्म के प्रति श्रद्धा, विश्वास, आत्मबोध से
जीवन होता सुखान्तक अथवा दुखान्तक
संभावनाओं के जंगल में भटकता दूर तक

हम सभी छल, मोह, माया,  लोभ, लिप्सा
विविध-कर्म-अकर्म में हो लिप्त
जीवन भर
भोगते प्रारब्ध अपने
कर्म-फल को झेलते

अन्ततः मृत्यु -भय से जब निकलती चीख
मर्मान्तक
उस समय भी चल रहे होते
प्रणय मन दूर तक।

                                     झाऊ का पुरवा, प्रतापगढ़, (उ.प्र.)
                                                1 मई, 2013

Thursday, 26 December 2013

शोक प्रस्ताव

राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी, रूपाम्बरा के निदेशक श्री राजेन्द्र जोशी, सुप्रसिद्ध कवि, साहित्यकार का दिनांक 25.12.2013 को प्रातः 11 बजे हृदयगति रूक जाने से भोपाल में अकस्मात निधन हो गया।

श्री जोशी ने लगभग 15 वर्षों तक राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी के विविध सम्मेलनों, संगोष्ठियों, समारोहों का सुचारू रूप से संचालन किया तथा रूपाम्बरा पत्रिका के नियमित लेखक रहे। श्री जोशी कवि, विद्वान, साहित्य कलाप्रेमी होने के साथ-साथ कुशल प्रशासक भी रहे और बहुत ही हंसमुख, विनोद प्रिय एवं स्नेहशील, मिलनसार व्यक्ति थे।

राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी, रूपाम्बरा उनके निधन पर गहरा शोक एवं दुःख प्रकट करती है। ईश्वर जोशी जी की आत्मा को शांति प्रदान करें तथा उनके शोक संतप्त परिवार के सदस्यों को इस अपूर्णीय क्षति से उबरने का साहस प्रदान करें।

         कोलकाता                                                            डॉ. स्वदेश भारती
         दिनांक - 25.12.13                                               अध्यक्ष
                                                                                    राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी,
                                                                                    रूपाम्बरा एवं
                                                                                    केन्द्रीय कार्यालय कोलकाता के माननीय सदस्यगण

क्या कांग्रेस का दूसरा विकल्प आम आदमी पार्टी?


आम आदमी पार्टी द्वारा दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में शनिवार, 28 दिसम्बर 2013 को दोपहर आयोजित शपथ समारोह में नई सरकार बनेगी। मुख्यमंत्री पद की शपथ श्री अरविन्द केजड़ीवाल लेंगे तथा अन्य पार्टी-विधायकों को मंत्रीपद की शपथ उप राज्यपाल द्वार दिलाई जाएगी।
इस दिन अखिल भारतीय कांग्रेस समिति का स्थापना दिवस भी है।
क्या कांग्रेस का दूसरा चेहरा आम आदमी पार्टी के रूप में देश के सामने उभरकर आएगा?

Friday, 20 December 2013

सादर समर्पित

ब्लॉग, फेसबुक, ट्विटर के साहित्य प्रेमियों, मित्रों, पाठकों, शुभचिन्तकों को यह सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि भारतीय वाङ्मय पीठ, कोलकाता द्वारा मुझे साहित्य शिरोमणि सारस्वत सम्मान (मानद उपाधि) द्वारा दिनांक 19 दिसम्बर 2013 को बंगला अकादमी, जीवनानन्द दास सभाकक्ष, नंदन परिसर, कोलकाता में  सम्मानित किया गया।

सम्मान समारोह में कोलकाता नगर के वरिष्ठ साहित्यकार, विशिष्ट अतिथि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

साहित्य शिरोमणि सारस्वत सम्मान मैं अपने सभी साहित्य प्रेमियों, ब्लॉग के मित्रों को संप्रीति, सादर समर्पित करता हूं।

-स्वदेश भारती
कोलकाता - 19.12.2013

Tuesday, 17 December 2013

12 दिसम्बर 2013 को मेरे 74वें जन्म दिन के उपलक्ष्य में

मित्रों! प्रशंसकों, साहित्य प्रेमियों, आत्मीय अभिभावकों, संस्थाओं आदि को मेरे जन्म दिवस-बधाई के लिए आभार एवं संप्रीति सहित सौहाद्रर्पूर्ण धन्यवाद!

मैं आपके साथ दिनांक 12 से 17 तक यानी 5 दिनों की प्रतिदिन लिखी कविताओं के साथ अपनी अंतर भावना जनित-चिन्तन को बांटना चाहता हूं और आप के मन्तव्य के लिए निवेदन करना चाहता हूं। आप सभी प्रसन्न रहें, सुखी रहें, स्वस्थ एवं सुरक्षित रहें।
                                                                                                   - स्वदेश भारती



किसिम किसिम के खेल
खतरनाक ढंग से लोग खेल रहे खेल
समय सागर-तीरे सत्ता-रेत में
कोई कोई ताबड़तोड़ कोई धीरे-धीरे
राजनेता, जननेता, धर्माचारी
मिथ्या आडम्बरी, बलशाली, लोभी, दुराचारी
किसिम किसिम की
किसिम किसिम से
खेल रहे सत्ता लोभ -खेल
कर रहे रोटी के वादे
किन्तु नेक नहीं हैं उनके इरादे
मुंशी, बाबू, धोबी, नाई, कर्मकार
खेतिहर, मजदूर, किस्मत के मारे
अराजकता के जंगल में सभी हैं मजबूर
बाढ़, सूखा, विपदा से विपन्न सूने खेत में
जब फसल बेकार होती
किसान, मजदूर की हिम्मत खोती
खोते आशा दिगन्त अधीरे
फुटपाथ, पल्लिपथ से उठता शोर
राजपथ पर चलती अस्मिता खंडित
क्षत-विक्षत, लहू लुहान
पश्चिम से उभरती व्यंग आवाज
वाह रे प्यारा हिन्दुस्तान
सबसे अच्छा हिन्दुस्तान।

                                     - कलकत्ता, 12 दिसम्बर


प्रभात-गीत
सबेरा ठंड से सिकुड़ गया है
पेड़ के पत्तों में बैठी उकड़ूं सघन हरियाली
तनों की गर्मी से सेक रही है ठिठुरन
पंछियों का झुंड क्षितिज में ओझल हो गया है
आकाश बादलों और धुन्ध से ढक गया है
हवा थम गई है
प्रातः कालीन अजान हो चुका है
मन्दिर में घंटियां, शंख बजकर
शान्त हो गए हैं।
चारों ओर शीतस्वनी खामोशी है
फुटपाथ पर अंगीठी में
चाय उबल रही है। सड़कों पर
रद्दी कागज चुनने वाला छोकड़ा
फटी कमीज पैंट में ठंड से सिहर रहा है
अट्टालिकाओं में सर्दी सेंध लगाकर
अनाहूत घुस आई है। आमिजात्य नर्म कम्बल और
रजाइयों में ढकें आंखें मीचे
फुटपाथ पर नाचता नगे बदन पागल
आबुल-ताबुल बड़बड़ाकर
क्रोध और आवेश में। ऊंचे फ्लैट से
सिनेमाई गीत के आने वाले स्वर
होठों पर सस्वर, थिरक रहा है। पत्थर फेंक रहा है।
अखबारी लड़के साइकिलों पर
दुनिया भर की खबरें बांटते हुए
तेज गति इस गली, गली भाग रहे हैं
कल जो कुछ घटनाएं घटी
उससे सुभिज्ञ होने के लिए
नागरिक उत्सुक, घरों में
चाय की चुस्कियों  ले रहे हैं
सूर्य की लालिमा यह रहस्य खोल रही है
कि प्रभात हो चुका है।

                        - कलकत्ता, 13 दिसम्बर (74वां जन्मदिन)



मित्रों के लिए
ब्लॉग, फेसबुक, ट्यूटर पर
मित्र बनने वाले
मेरे लेखन पर टिप्पणी, मन्तव्य, सुझाव
अभिमत देने वालों को धन्यवाद देता हूं
किन्तु मन में अहसास होता है
कि ब्लॉग, फेसबुक, ट्यूटर पर
अपने अनुभव, विचार लिखना
जैसे दो बासों से बंधी रस्सी पर
सम्हल कर चलना है
लोग मुझे या मेरी दशा
अथवा मनीषा के विविध आयामों की कशिश
जीवन के ताने-बाने को नहीं देख पाते
बस जो लिख दिया
उसी पर अपने विचार प्रकट करते जाते
ऐसे में धन्यवाद के शब्द से
व्यवहार-कुशलता की रेखाएं खींचता हूं
मन में यह आश्वस्ति पाता हूं
कि चलो विश्व-जनसंवाद से जुड़ा
एकन्तिक पथ से
आत्मीयता के सहअस्तित्व की ओर मुड़ा
भावना सर्जित चिन्तन को
ब्लॉग पर, अनन्त आकाश में निर्मुक्त
अस्तित्व के डैने खोले उड़ा

                                                              - कलकत्ता, 14 दिसम्बर




 आत्मगत-मौन

आत्मगत मौन का अवसाद बेहद गहरा होता है
और जीवन के एकाकी क्षणों में
जब भी अवसाद की गहराई नापने का यत्न किया
अतीत का विष ही पिया
मुझे लगती है अन्तर-कुठार के प्रति
समय असंबंधित मूक और बहरा होता है

प्रकृति के मौसम-परिवर्तन के बीच
समय को तीव्र गति से भागते हुए देखा है
ऐश्वर्य-शाला में मदमस्त नाचते देखा है
निर्धन, अभावग्रस्त, विषाद-दुःख से जर्जर
मनुष्य की तकदीर लिखते देखा है
किन्तु बदलाव की आंधी जब भी आई
आम-जन को उड़ाकर निर्मूल कर गई
अस्तित्व की सर्जित अथवा
विसर्जित रेखा से दूर
समय-सागर को उद्वेलित-आन्दोलित
अट्ठहास करते किंकर्तव्यविमूढ़ देखा है

सघन कुहासा जब भी मेरे मौन के आरपार छाया
न जाने कितने संदर्भों में
कितनी बार, क्षितिजों के आर पार
समय-पाखी को दिशाएं बदलते देखा है
अनहद-नाद के बीच
आत्म-व्यथा से सजल आंखें भींच....

                                                                - कलकत्ता, 15 दिसम्बर




अनहद नाद

प्रथम शब्दनाद रुदन से प्रारम्भ होकर
अपने रुपाकार को बढ़ाता
जोड़ता नये-नये रिश्ते नाते
अहनद-नाद से अस्तित्व जोड़ता

आदि से अन्त तक
अनन्त संदर्भों में
अपनी ईकाई घटाता-बढ़ाता
ढाई आखर को नव शब्द- स्वर देता
अथवा पद दल्लित करता
आत्म-अनात्म-बोध के गलियारों में
नए-नए आकर्षण-आशा-जाल में बंधा
अतीत की स्मृतियों के
निर्जन, उदास, एकाकी
रंगलीला की व्यथा-कथा को उजागर करता
वर्तमान के व्यामोह को तोड़ता

प्रथम-शब्द-नाद गर्भ धारिणी मां को
जहां नैसर्गिक सुख-आनन्द देता
जीवन के अवसान पर
वही शब्दनाद रुलाता, व्याकुल व्यथित करता
अनहद-नाद से जोड़ता
हमारे आत्म-पथ को
अजानी दिशा की ओर मोड़ता

                                                     - कलकत्ता, 16 दिसम्बर

Thursday, 12 December 2013

आज के संदर्भ में

आजादी के 66वें वर्ष भारतीय लोकतंत्र को, आम आदमी को भ्रष्ट, स्वार्थी, सत्ता लोलुप राजनीतिज्ञों से बहुत बड़ा खतरा है। गठबंधन की राजनीति, संघीय मोर्चा या जोड़-तोड़ से बने संयुक्त मोर्चा से जहां देश का विकास अवरुद्ध होगा वहीं इससे राजनीति-परस्त नेताओं के लोभ और अहम् की तुष्टि होगी। देश में विखराव पैदा होगा। आम आदमी के बीच संकट उपस्थित होगा।
                                                                                         


जन लोकपाल

अन्ना हजारे द्वारा प्रारम्भ किए जन लोकपाल आन्दोलन को सारे देश के बुद्धिजीवियों, आम आदमियों का पूरा समर्थन प्राप्त है। जन लोकपाल द्वारा देश को भ्रष्टाचार्, राजनीति के गन्दे इरादों से मुक्ति मिलेगी। विकास का रास्ता खुलेगा और सच्चा जनतंत्र आएगा।

                                                                                                      - स्वदेश भारती
                                                                                                          साहित्यकार

Sunday, 8 December 2013

Swadesh Bharati: भाई अरविन्द केजरीवाल का हार्दिक अभिनन्बदन।  उन्हों...

Swadesh Bharati: भाई अरविन्द केजरीवाल का हार्दिक अभिनन्बदन।  उन्हों...: भाई अरविन्द केजरीवाल का हार्दिक अभिनन्बदन।  उन्होंने भारतीय राजनीति में नये परिवर्तन की दिशा दिखाई यह ऐतिहासिक अवसर चिर स्मरणीय रहेगा। दि...
भाई अरविन्द केजरीवाल का हार्दिक अभिनन्बदन।  उन्होंने भारतीय राजनीति में नये परिवर्तन की दिशा दिखाई यह ऐतिहासिक अवसर चिर स्मरणीय रहेगा।

दिल्ली विधानसभा चुनाव देखकर भारतीय राजनीति को आम आदमी पार्टी (आप) से सीख लेनी चाहिए।

अब भ्रष्ट, मुस्टंडी, कुर्सी-लोलुपों, कालाबाजारी करने वालों, जाति, धर्म, के नाम पर वोट की राजनीति करने वालों को आप से सीख लेनी चाहिए।

                                                                                             - स्वदेश भारती
                                                                                               (साहित्यकार)

Wednesday, 20 November 2013

Swadesh Bharati: रिपोर्ट - अंतर्राष्ट्रीय सार्क भाषा साहित्य सम्मेल...

Swadesh Bharati: रिपोर्ट - अंतर्राष्ट्रीय सार्क भाषा साहित्य सम्मेल...: रिपोर्ट अंतर्राष्ट्रीय सार्क भाषा साहित्य सम्मेलन गंगटोक (सिक्किम) 27, 28 एवं 29 अक्टूबर, 2013 राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 144वीं...

रिपोर्ट - अंतर्राष्ट्रीय सार्क भाषा साहित्य सम्मेलन, गंगटोक (सिक्किम) 27, 28 एवं 29 अक्टूबर, 2013

रिपोर्ट

अंतर्राष्ट्रीय सार्क भाषा साहित्य सम्मेलन

गंगटोक (सिक्किम) 27, 28 एवं 29 अक्टूबर, 2013


राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 144वीं जयंती के उपलक्ष्य में एवं राष्ट्रीय आजादी की 66वीं वर्षगांठ के अवसर पर राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी रूपाम्बरा द्वारा सिक्किम की राजधानी गान्तोक में 27 से 29 अक्टूबर 2013 तक अंतरराष्ट्रीय भाषा साहित्य सम्मेलन का आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। सम्मेलन में भारत सरकार के मंत्रालयों, विभागों निगमों, उपक्रमों तथा प्रादेशिक सरकारों के प्रतिनिधि, सुप्रतिष्ठित लेखक, कवि, विद्वान लगभग 200 की संख्या में उपस्थित थे। सम्मेलन का उद्घाटन सिक्किम के माननीय मुख्यमंत्री के स्थान पर श्री एन. के. प्रधान, माननीय उच्च शिक्षामंत्री ने किया तथा अध्यक्षता विशिष्ट अतिथि सिक्किम के विधानसभा-सदस्य श्री डोरजी नामग्याल ने किया। सम्मेलन का उद्घाटन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को माल्यार्ण कर एवं पंच प्रदीप जलाकर करतल ध्वनि के साथ किया गया। मुख्य अतिथियों एवं उपस्थित प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी रूपाम्बरा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कविवर स्वदेश भारती ने स्वागत वक्तव्य में कहा कि भाषा एवं साहित्य संस्कृति की नदी के दो तट होते हैं। नदी के प्रवाह के लिए तटों का होना आवश्यक है। मनुष्य की सभ्यता के प्रारब्ध से लेकर आज तक भाषा और साहित्य ने समाज, राजनीति एवं मानव व्यवहार को प्रभावित किया, नये अवदान प्रदान किए। जहां राजनीति अवसरवाद तथा लोभ से मनुष्य को किसी न किसी प्रकार तोड़ती है। वहीं भाषा, साहित्य एवं संस्कृति मनुष्य को जोड़ती है। यह सम्मेलन भाषा साहित्य एवं संस्कृति के उन्नयन की दिशा में एक कारगर कदम है। श्री भारती ने यह भी कहा कि मनुष्य जब भाषा और संस्कृति का दामन छोड़ देता है तब उसका अधोपतन प्रारम्भ हो जाता है। यह बात व्यक्तिगत भी हो सकती है और सामाजिक तथा राजनीतिक स्तर पर भी लागू होती है। इसलिए हमें आज के माहौल में राजनीति की भाषा की राजनीति में आना होगा। भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के व्यापक उन्नयन के लिए कार्य करना होगा। श्री दोरजी नामग्याल ने अपने भाषण में कहा कि सिक्किम एक छोटा सा प्रदेश है। यहां कई भाषाएं चलती हैं और सिक्किम की प्रत्येक भाषा में जो भी साहित्य लिखा जाता है उस पर हम गम्भीरता के साथ काम करते हैं। यहां सिक्किम नेपाली अकादमी है जो  नेपाली भूटिया, लेप्चा लेखकों को प्रोत्साहन देती है। सिक्किम में अंतराष्ट्रीय भाषा साहित्य सम्मेलन अकादमी ने आयोजित किया इसके लिए सिक्किम की जनता अकादमी के प्रति आभार प्रकट करती है। यह बात सही है कि भाषा साहित्य और संस्कृति के बिना हम एक पग भी आगे नहीं बढ़ सकते। सारे राष्ट्र के लिए एक भाषा होना जरूरी है। और वह हिन्दी होनी चाहिए। श्री एन. के. प्रधान माननीय उच्च शिक्षा मंत्री ने मुख्य अतिथि के रूप में अपने भाषण में कहा कि सिक्किम में बॉलीवुड हिन्दी चलती है, जिसे सिक्किम के बहुसंख्यक लोग बोलते हैं। सिक्किम में नेपाली, भुटिया और लेप्चा भाषाएं प्रचलित हैं, परन्तु लगभग 95 प्रतिशत लोग नेपाली हिन्दी बोलते हैं। इससे लोगों में एकता स्थापित है। हमें अपनी भाषा को उत्तरोतर आगे बढ़ने के लिए प्रयास करना चाहिए। हम अपने प्रदेश में भाषा के माध्यम से एकता और सौहार्द्र स्थापित करने का प्रयास करते हैं।
उद्घाटन समारोह में सम्मेलन स्मारिका के रूप में रूपाम्बरा का भाषा-साहित्य विशेषांक, डॉ. स्वदेश भारती द्वारा संपादित वृहत् कार्यालयीन तकनीकी भाषा कोश तथा कई अन्य लेखकों की पुस्तकों का विमोचन हुआ। इसके साथ मध्य प्रदेश सरकार की राजभाषा पत्रिका पंचायिका भारत सरकार टकसाल की मुम्बई मिन्ट पत्रिका, गौहाटी रिपाइनरी की प्रागज्योतिका, बैंक आफ महाराष्ट्र पुणे की पत्रिका- महाबैंक प्रगति तथा गोवा शिपयार्ड की राजभाषा पत्रिका- गोवायार्ड समाचार को अंतर्राष्ट्रीय राजभाषा पत्रिका शील्ड सम्मान द्वारा मुख्य अतिथि श्री प्रधान ने सम्मानित किया।
लोकसभा सचिवालय मध्य प्रदेश, माध्यम भारत प्रतिभूति मुद्रण एवं मुद्रा निर्माण निगम मुम्बई, गोवाशिपयार्ड लिमिटेड गोवा, गौहाटी रिफाइनरी, इंडियन आयल कार्पोरेशन, गुवाहाटी, कम्पनी रजिस्ट्रार, भारत सरकार, पश्चिम बंगाल, कोलकाता, रेलमंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली आदि को अंतर्राष्ट्रीय राजभाषा शील्ड सम्मान द्वारा सम्मानित किया गया।
नेपाली के प्रख्यात लेखक, कवि श्री वीरभद्र कार्कीढोली तथा 10 सम्मेलनों में लगातार भागीदारी करने के लिए संसदीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार में सहायक निदेशक, राजभाषा सुश्री मृगनैनी को विशिष्ट हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया।
दिनांक 28.10.13 को आयोजित अंतर्राष्ट्रीय साहित्य संगोष्ठी का विषय था भारतीय भाषाओं के उन्नयन तथा विकास में तकनीकी प्रशिक्षण की अनिवार्यता। इस संगोष्ठी की अध्यक्षता श्री प्रमोद मोहन जौहरी, मुख्य महाप्रबंधक (मा.सं. एवं प्रशासन) गोवा शिपयार्ड लि. ने किया। इस संगोष्ठी के संचालन के लिए एक पैनल बनाया गया था जिससे डॉ. अनिल कुमार शर्मा, मुख्य महाप्रबंधक, भारत सरकार, टकसाल, मुम्बई, श्री के.पी. सत्यानन्दन, निदेशक, राजभाषा, रेल मंत्रालय, रेलवे बोर्ड, नई दिल्ली, श्री नगेन्द्र कुमार मिश्र, प्रबंधक राजभाषा, इंजीनियर्स लि. नई दिल्ली थे। डॉ. स्वदेश भारती ने संगोष्ठी का शुभारम्भ करते हुए कहा कि भाषा और साहित्य मानव शरीर में रीढ़ और मस्तिष्क की तरह काम करते हैं। उन्होंने इस बात पर दुःख प्रकट किया की सभी राजनेता वोटों की राजनीति में फंसते जा रहे हैं। भाषा और साहित्य की चिन्ता किसी को नहीं है। जबकि किसी भी राष्ट्र की सार्वभौम सत्ता के लिए चार बातें महत्वपूर्ण होती हैं- 1. संविधान, 2. राष्ट्र ध्वज, 3. राष्ट्रगान, 4. राष्ट्रभाषा। विश्व की सभी भाषाएं आज जितनी अधिक तेजी से तरक्की कर रही हैं हम उनके बहुत पीछे हैं। केन्द्र सरकार द्वारा पोषित संचालित अकादमियां अथवा प्रादेशिक सरकारों द्वारा स्थापित किए गए भाषा संस्थान उस मात्रा में काम करते हैं। जितना आज के परिवेश में भाषा, साहित्य के उन्नयन हेतु होना जरूरी है। इसलिए हमें गम्भीरता के साथ यह सोचना होगा कि बेहतर अनुवादों के माध्यम से भारतीय भाषाओं को सार्क देशों की भाषाओं के साथ जोड़कर दक्षिण पूर्वी एशिया में भाषा साहित्य का व्यापक रूप से प्रचार-प्रसार किया जा सके। यह सम्मेलन इसी बात को रेखांकित करना चाहता है कि हम केवल राजनीति के फैशन स्वार्थ और अपनी सुख-सुविधा में ही उलझे नहीं रहे, बल्कि राष्ट्रीय अस्मिता, गौरव तथा सामाजिक उत्थान हेतु भाषा और साहित्य को अधिक उन्नतिशील बनाएं।
डॉ. अनिल कुमार शर्मा, मुख्य महाप्रबंधक, भारत सरकार टकसाल, मुम्बई ने कहा कि हमें हिन्दी को सार्क देशों में अनुवाद के माध्यम से ले जाना चाहिए तथा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में सरकार की व्यापक भूमिका होनी चाहिए। श्री केपी सत्यानन्दन निदेशक, रेलवे बोर्ड, रेल मंत्रालय ने कहा कि हिन्दी कार्यान्वयन में रेल मंत्रालय सबसे आगे है। हमने सारे देश में कम्प्यूटरों पर टिकट आरक्षण करने के लिए हिन्दी का साफ्टवेयर प्रोन्नत किया। हमारे सभी विभागों एवं कार्यालयों में हिन्दी का काम बहुत तेजी से चल रहा है। इस सम्मेलन में हमें अंतर्राष्ट्रीय राजभाषा शील्ड सम्मान देकर जो प्रोत्साहन दिया गया है, उसका हम सम्मान करते हैं और यह आश्वस्त करते हैं कि भारतीय रेल हिन्दी कार्यान्वयन में सबसे आगे चलने के लिए हर तरह से तैयार है। श्री नगेन्द्र कुमार मिश्र, प्रबंधक, इंजीनियर्स इंडिया लि. ने कहा कि अंग्रेजी की मानसिकता को हटाना चाहिए। हिन्दी के विकास में हिन्दी के पंडित अधिक बाधा डालते हैं। हिन्दी कोश तो बनाए गए, लेकिन शब्द बेहद क्लिष्ट है। साहित्य की भाषा अलग होती है। बोलचाल और काम करने की भाषा अलग होती है। साहित्यकार संपादक श्री महेन्द्र गगन ने कहा कि भारतीय भाषाओं में अधिक अनुवाद होना चाहिए। अनुवाद प्रशिक्षण पर अधिक से अधिक ध्यान देना चाहिए। श्री ए.के. कारबल, वरिष्ठ लेखाधिकारी, भारतीय रेलवे ने कहा कि सरल हिन्दी में अनुवाद के माध्यम से विषय की अच्छी जानकारी प्राप्त हो सके, ऐसा प्रयास होना बहुत जरूरी है। संगोष्ठी में लगभग चौबीस अधिकारियों एवं साहित्यकारों ने भाग लिया। संगोष्ठी का समापन करते हुए अध्यक्ष श्री जौहरी ने कहा कि महाभारत के भीतर विस्तृत तकनीकी पक्ष मौजूद थे। महाभारत में जीवन की सामाजिक एवं संस्कृतिक व्यवहारिता है। रामचरित मानस में भी तकनीकी पक्ष है। हमें उसका प्रभाव पूरी तरह से जानना चाहिए। श्री जौहरी ने यह भी कहा कि प्रशासन मे 3.60 डीग्री की बात होती है। इसलिए प्रत्येक प्रशासनिक को अपने काम को जिसमें हिन्दी शामिल हो सत् प्रतिशत बेहतर ढंग से संयोजित-संचालित करना चाहिए। कार्यालयों में भाषा को अधिक से अधिक महत्व देना जरूरी है। उन्होने यह भी कहा परिवर्तन प्रकृति का नियम है। हिन्दी की दिशा तथा दशा को सुधारना हम सब का सम्मिलित काम है। मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान है। यह बात सच है कि अब अंग्रेजी की मानसिकता को हटाना चाहिए। कम्प्यूटर में गुगुल पांच तरह की भाषाएं प्रयोग करता है। भाषा की संवेदनात्मकता मशीनी अनुवाद के माध्यम से उपलब्ध नहीं होती। अनुवाद को शुद्ध, सरल भाषा में इस्तेमाल करना चाहिए। सरल हिन्दी में अनुवादकों को प्रशिक्षण दिया जाए। जिससे वे उस विषय में अच्छी जानकारी प्राप्त हो सके। इसी सत्र में हिन्दी का अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप, भूमंडलीकरण, वैश्वीकरण के दौर में शामिल कर लिया गया था। लंच के बाद हिन्दी प्रयोग एवं प्रचार-प्रसार में कठिनाइयां और निदान विषय पर चर्चा आरम्भ हुई। इस सत्र के अध्यक्ष साहित्यकार श्री महेन्द्र गगन थे। संगोष्ठी के पैनल में श्री वी. के. जैन मुख्य अधिकारी राजभाषा, रेल मंत्रालय, पटियाला, श्री मेहरबान सिंह नेगी, उप महाप्रबंधक, उत्तर रेलवे नई दिल्ली, श्री भरत सिंह यादव, प्रबंधक राजभाषा, इंजीनियर्स इंडिया लि., श्रीमती लता अम्बवानी, पर्यवेक्षक (मा.सं), पावर ग्रिड कार्पोरेशन इंडिया लि., डॉ. नरेश मिश्रा, संपादक-लोकसभा, श्री अशोक कुमार कारवल, पंचायती राजमंत्रालय, भारत सरकार श्री नरेश मिश्रा, सम्पादक, लोकसभा, प्रो. एस. चन्द्रैया, हैदराबाद आंध्र प्रदेश। इस संगोष्ठी का शुभारम्भ करते हुए श्री प्रमोद मोहन जौहरी, मुख्य महाप्रबंधक, गोवाशिपयार्ड ने कहा कि हम झील बने तो ठहरे रहे, दरिया बनते तो दूर निकल जाते। हिन्दी को दरिया की रवानी बनाना है। आम आदमी कौन सी भाषा समझ सकता है वैसी ही भाषा का प्रयोग होना चाहिए। सरकारी कार्यालयों में पदस्त हिन्दी अधिकारियों को यह बात समझना है। श्री नगेन्द्र कुमार मिश्र, वरिष्ठ प्रबंधक इंजीनियर्स इंडिया ने कहा कि तकनीकी ज्ञान के लिए मानसिकता को बदलना जरूरी है। तकनीकी भाषा के अंदर तकनीकी शब्द बंधा होता है। शब्दों के चयन में स्तरीय ज्ञान होना जरूरी है। अनुवाद बिना मूल भाषा ज्ञान और मनोयोग के ठीक-ठीक नहीं हो पाता। हमारे कम्प्यूटर के अंदर इंडेक्शन कोड होता है। जिसे समझना चाहिए। तकनीकी शब्दावली आयोग द्वारा निर्मित की गई तकनीकी शब्दावली में कठिन शब्दों की भरमार है। जिसमें सरल और सहज अनुवाद करना असंभव हो जाता है। श्री अशोक कुमार अधिकारी, पंचायती राज मंत्रालय ने कहा कि हम मानसिक गुलामी के शिकार हैं। जब हम इस गुलामी को छोड़ेंगे तभी हिन्दी को अपना पाएंगे। सरल, बोल चाल की भाषा को हिन्दी के माध्यम से ही हिन्दी को आम जनता तक पहुंचाना है। संगोष्ठी का समापन करते हुए डॉ. सी. एच. चंद्रैया, हैदराबाद से पधारे साहित्यकार ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि देश में हिन्दी के व्यापक प्रचार प्रसार में राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी का बहुत बड़ा योगदान रहा है। अकादमी को हिन्दी को राष्ट्रसंघ की भाषा स्वीकृत कराने में आगे आना चाहिए। हिन्दी सरकारी आदेशों, संसदीय समितियों की सिफारिशों से नहीं बल्कि लोगों की जागरूकता से राष्ट्रभाषा बनेगी और गांधीजी का सपना तभी पूरा होगा। डॉ. एस.बी. प्रभु देसाई, वरिष्ठ प्रबंधक, गोवा शिपयार्ड ने कहा कि हिन्दी के अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप हेतु इंस्क्रिप्ट का प्रयोग जरूरी है। भूमंडलीकरण के दौर में कम्प्यूटर के माध्यम से हिन्दी का प्रयोग हो रहा है। रूपाम्बरा जैसी साहित्यिक पत्रिका का हर अंक को नेट पर होना चाहिए। हिन्दी रूस, लंदन, चीन, अमरिका, जापान आदि देशों में पहुंच गई, परन्तु अपने देश में अभी भी आजादी के 65 वर्षों के बाद भी हिन्दी के प्रति हम उदासीन रहते हैं। हिन्दी दिवस, हिन्दी सप्ताह साल में एक बार नहीं, बल्कि प्रतिदिन, प्रतिमाह मनाना चाहिए। और प्रादेशिक सरकारें भी यह काम करें। अभी तक हिन्दी को राष्ट्रसंघ में मान्यता नहीं मिली। जबकि छोटी-छोटी भाषाओं को मान्यता मिली है। श्री पी. एम. जौहरी अपने समापन वक्तव्य में कहा- असतो मां सद् गमय, तमसो मां ज्योतिगमय, मृत्योर्मा अमृतम् गमय का दृष्टांत देते हुए कहा कि हम अच्छी चीजों को ग्रहण नहीं करते। हमारे भीतर असीम क्षमता है, हमें उसे बाहर लाना है। भारत तभी पूर्णतया विकसित होगा। जब हिन्दी को राष्ट्र भाषा के रूप में लागू किया जाए। संविधान में राजभाषा की जगह राष्ट्रभाषा होना चाहिए। हिन्दी को राष्ट्रसंघ की भाषा बनाने के लिए जोदार प्रयास होना जरूरी है। इन सत्रों में सर्वश्री हीरा लाल त्रिवेदी (भोपाल), श्री आदित्य कुमार मित्तल, मुख्य अधिकारी (राजभाषा) पूर्वी रेलवे (कोलकाता), श्री लक्ष्मण शिवहरे, राजभाषा अधिकारी, दक्षिण मध्य रेलवे (सिकंदराबाद) श्रीमती विनीता ब्रह्न, गुवाहाटी रिफाइनरी (असम), श्री वेदपाल सिंह, निजी सचिव, पावर ग्रिड कार्पोरेशन (गुड़गांव), श्री के. डी. पासवान, श्री वीरेंद्र सिंह वरिष्ठ अधिकारी, उत्तर फ्रोंटियर रेलवे (नई दिल्ली), श्री अभिषेक कुमार, प्रबंधक, नीपको (शिलांग), श्री पद्माकर मिश्र एक्जिम बैंक (मुम्बई), श्री नीलेश कुमार, बैंक आफ महाराष्ट्र, जोनल आफिस (कोलकाता), डॉ. बी. पी. देवांगन, मध्य प्रदेश माध्यम (भोपाल), श्री भगवानदास भूमरकर, संपादक पंचायिका, मध्य प्रदेश माध्यम (भोपाल), श्री नरेश मिश्रा, संपादक, लोकसभा  (नई दिल्ली), डॉ. पूनम चतुर्वेदी, भारत सरकार टकसाल, श्री भरत सिंह यादव, प्रबंधक, इंजीनियर्स इंडिया लि. श्री मेहरबान सिंह नेगी, उपमहाप्रबंधक, उत्तर रेलवे, श्री टेक बहादुर क्षेत्री, भारतीय भाषा विभाग काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने भाग लिया।
सम्मेलन में राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी द्वारा संचालित, स्वमूल्यांकन सत्र में प्रतिनिधियों ने भाग लिया। लिखित परीक्षा-प्रश्न पत्र के तीन विशिष्ट सफल प्रतिभागियों का प्रथम, द्वितीय, तृतीय चुनाव किया गया। जिन्हें स्वमूल्यांकन प्रमाण पत्र, राजभाषा शील्ड सम्मान द्वारा सम्मानित किया गया। स्वमूल्यांकन सत्र की अध्यक्षता प्रो. सी. चंद्रैया ने की। सम्मेलन के प्रस्तावों  के लिए श्री पी. एम. जौहरी, मुख्य महाप्रबंधक गोवा शिपयार्ड की अध्यक्षता में प्रस्ताव उप समिति का गठन किया या। जिसमें निम्नलिखित सदस्य थे—
1.       श्री के पी. सत्यानंदन, निदेशक, रेलवे बोर्ड
2.       श्री अनिल कुमार शर्मा, मुख्य महाप्रबंधक
3.       नरेश मिश्र, संपादक, लोकसभा सचिवालय
4.       श्रीमती लता अम्बवानी, पर्यवेक्षक, पावर ग्रिड कार्पोरेशन
5.       डॉ. एस. बी. प्रभुदेशी, संसदीय कार्य मंत्रालय वरिष्ठ प्रबंधक, गोवा शिपयार्ड
6.       श्री भरत सिंह यादव, वरिष्ठ प्रबंधक (राजभाषा)
7.       प्रो. सी. एच. चन्द्रैया, वरिष्ठ विद्वान, साहित्यकार
8.       श्री अभिषेक कुमार, प्रबंधक, नीपको, शिलांग
9.       श्री लक्ष्मण शिवहरे, वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी, पावर ग्रिड दिनांक 29.10.13 को प्रातः 8 बजेसे दोपहर 1 बजे, शैक्षणिक पर्यटन के अंतर्गत प्रतिनिधियों ने सिक्किम के दर्शनीय स्थलों का परिभ्रमण किया। अपराह्न 3 बजे से 5 बजे तक समापन सत्र समारोह की अध्यक्षता श्री डोरजी नामग्याल, सिक्किम विधानसभा के वरिष्ठ सदस्य ने की। सम्मेलन प्रस्ताव समिति के अध्यक्ष श्री श्रीपी एम जौहरी ने प्रस्ताव प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। जिसे सभी सहभागियों ने एकमत से करतल ध्वनि के साथ समर्थन किया।
इस अवसर पर सभी प्रतिनिधियों को मुख्य अतिथि श्री डोरजी नामग्याल के हाथों से सम्मेलन स्मृति चिह्न, प्रमाण पत्र द्वारा सम्मानित किया गया। श्री डोरजी नामग्याल ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि मुझे इस सम्मेलन में आकर बहुत खुशी हुई। खासकर जब यह देखा कि भारत सरकार तथा प्रदेश की सरकारों ने इतने अधिक बड़े-बड़े अधिकारी, लेखक, विद्वान एक साथ इकट्ठा होकर भाषा साहित्य के बारे में और हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए गम्भीरता पूर्वक विचार तीन दिनों से कर रहे हैं। सम्मेलन में सभी को सम्मानित करना बहुत अच्छी परम्परा है। ऐसे बड़े सम्मेलनों से आपसी भाईचारा और सौहार्द्र बढ़ता है, देश की अखंडता सुदृढ़ होती है। जैसा कि अभी-अभी पारित किए गए प्रस्तावों से मुझे जानकारी मिली। यह सभी प्रस्ताव भारत सरकार तथा प्रादेशिक सरकारों को मानना चाहिए। इन प्रस्तावों से भाषा साहित्य को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
समापन सत्र के अंत में मुख्य अतिथियों प्रतिभागियों, मीडिया एवं सिक्किम, गान्तोक के विशिष्ट अतिथियों को सम्बोधित करते हुए अकादमी अध्यक्ष डॉ. स्वदेश भारती ने कहा कि भाषा साहित्य के बिना जीवन शून्य तथा जर्जर होता है। शब्दों की महत्ता को समझना ही बुद्धिमत्ता है। भाषा साहित्य मनुष्य के जीवन को आनन्द से भर देता है। इसलिए भाषा साहित्य के प्रति अस्थावान होना सभी के लिए जरूरी है। मैं उपस्थित प्रतिभागियों और सिक्किम की जनता को विशेष धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने सम्मेलन को सफल बनाया। श्री भारती ने कहा कि लगभग 25 वर्षों से राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी के संचालन में सक्रिय योगदान देने वाले अकादमी के मानद अध्यक्ष, पूर्व सांसद डॉ. रत्नाकर पांडेय एवं निदेशक श्री राजेन्द्र जोशी, अपनी गम्भीर अस्वस्थता के कारण सम्मेलन में उपस्थित नहीं हो सके। प्रवर समिति के कई सम्मानीय सदस्य भी अपरिहार्य कारणों से इस सम्मेलन में पहुंच नहीं पाए। हम सभी सम्मेलन के प्रतिनिधि डॉ. पांडेय एवं श्री जोशी के शीघ्र स्वस्थ होने के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता हूं।
दिनांक 25.11.2013 को होटल टाशी डेलेक में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में गान्तोक, सिक्किम में स्थित राष्ट्रीय मीडिया, दूरदर्शन, आकाशवानी आदि के 25 प्रतिनिधि उपस्थित थे। तीन दिनों का सम्मेलन का कवरेज मीडिया ने व्यापक रूप से प्रचारित-प्रसारित किया। प्रसार भारती दूरदर्शन, आकाशवानी तथा अन्य चैनलों ने प्रचारित-प्रसारित की। सिक्किम मेल, सिक्किम एक्सप्रेस, हिमाली बेला, हिमाली दर्पण, जमाना, नयुमा समाचार, समय दैनिक, दैनिक जागरण आदि ने विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की। उद्घाटन सत्र के दिन विशेष रूप से आयोजित सिक्किम के कलाकारों ने अपने मनोरम नृत्यगान द्वारा सिक्किम के बहुआयामी संस्कृतिक की झलकियां अत्यधिक सुन्दरता के साथ प्रस्तुत की। सभी प्रतिभागी उसे देखकर मंत्रमुग्ध रह गए और आनन्दमग्न होकर कलाकारों के साथ नृत्य भी करने लगे। सम्मेलन की विशेष उपलब्धि है कि सभी प्रतिनिधियों ने सम्मेलन को गम्भीरता पूर्वक आत्मसात किया। और प्रसन्नचित होकर अपने-अपने स्थानों पर लौटे।

अंतर्राष्ट्रीय सार्क भाषा साहित्य सम्मेलन गान्तोक, 27-29 अक्टूबर 2013
प्रतिवेदन-प्रस्ताव
1.       राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी, रूपाम्बरा द्वारा भारत सरकार द्वारा गठिन माननीय संसदीय राजभाषा समिति की तीनों उप-समितियों में हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिए जाने की सिफारिश की जाए।
2.       स्वैच्छिक स्वयं सेवी संस्थाएं (एनजीओ) जो हिन्दी के प्रगति का प्रचार-प्रसार कर रही है, उन्हें आर्थिक सहायता एवं उपयोगी संसाधन प्रदान किए जाएं।
3.       प्रत्येक कार्यालय में कुछ कठिनाइयां जैसे संसदीय राजभाषा समिति की प्रश्नावली, रिपोर्ट विवरण, आश्वासन आदि को सही तरीके से भरने की सुनिश्चितता करने के लिए नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति के माध्यम से कार्यक्रम चलाए जाएं।
4.       वर्तमान कार्य पद्धति को ध्यान में रखते हुए समिति की प्रश्नावली का सरलीकरण कर व्यवहारिकता से जोड़ी जाए।
5.       लोकसभा की भांति राज्यसभा में भी हिंदी सलाहकार समिति गठित की जाए।
6.       हिंदी विज्ञापनों का प्रतिशत न्यूनतम 50 प्रतिशत हो, क्षेत्र में सभी सरकारी विज्ञापन तथा विदेशी कंपनियों के विज्ञापन हिंदी में देने के लिए राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय उचित निर्देश दें।
7.       सार्क देशों में भी हिन्दी के व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों की श्रृंखला प्रारंभ की जाए।
8.       हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएनओ) की सूची में शामिल किया जाए। उसके लिए आवश्यक धन की व्यवस्था केन्द्रीय सरकार यथाशीघ्र करें।
9.       राज्य स्तर पर वर्ष में एक बार राजभाषा सम्मेलन का आयोजन किया जाए जिससे केन्द्रीय तथा राज्य सरकार आर्थिक सहयोग प्रदान करें और इसकी शिफारिसें भारत सरकार को भेजी जाए।
10.   राज्य स्तर पर 14 सितम्बर को हिंदी दिवस सभी प्रांतीय सरकार द्वारा भी मंनाया जाए।
11.   जो कर्मचारी हिंदी में अपेक्षाकृत अधिक कार्य करते हैं उनका वार्षिक मूल्यांकन करते समय वरीयता अंक दिए जाएं जो उनकी पदोन्नति में सहायक हो, यह व्यवस्था केन्द्रीय तथा राज्य सरकार के उपक्रमों में लागू की जाए।
12.   केंद्रीय विश्वविद्यालय द्वारा छात्र-एक्सचेंज कार्यक्रम के अंतर्गत विदेशों में हिंदी के विकास के लिए छात्र भेजे जाए उसी तरह विदेशी छात्रों को भी इस कार्यक्रम के अंतर्गत आमंत्रित किए जाए तथा इसके लिए एक पर्याप्त अवधि सुनिश्चित की जाए। इस कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए केंद्रीय सरकार और केन्द्रीय विश्वविद्यालय सहयोग प्रदान करें।
13.   संविधान में संशोधन किया जाए तथाराजभाषा को राष्ट्रभाषा किया जाए।
14.   ऐसे देशों में जहां भारतीय मूल के नागरिकों की संख्या अधिक है वहां हिन्दी के अध्यापन हेतु अध्यापकों की संपूर्ति की जाए।
15.   देश के सारे स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों में त्रि-भाषा फार्मूला अनिवार्य रूप से लागू किया जाए।
16.   हिंदीत्तर राज्यों में हिंदी अध्यापन से जुड़ी अध्यापकों के लिए प्रोत्साहन योजना लागू की जाए तथा शिक्षकों को भारत सरकार द्वारा पुरस्कृत किया जाए।
अध्यक्ष, पी. एम. चौहरी, मुख्य महाप्रबंधक (मानव संसाधन) गोवा शिपयार्ड लिमिटेड, वास्को, गोवा,  डॉ. सी. एच. चंद्रैया, पूर्व आचार्य हैदराबाद विश्वविद्यालय, डॉ. एस. बी. प्रभु देसाई, वरिष्ठ प्रबंधक (राजभाषा), गोवा शिपयार्ड लिमिटेड, वास्को गोवा, अभिषेक कुमार प्रबंधक (मानव संसाधन), नार्थ इस्टर्न इलैक्ट्रिक पावर कं. लि. शिलांग, श्री लक्ष्मण शिवहरे, वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी, दक्षिण मध्य रेवले, सिकन्दराबाद, श्रीमती लता अम्बानी, पर्यवेक्षक (मानव संसधान) पावर ग्रिड कं. गुड़गांव तथा अन्य सम्मानित सदस्य, प्रतिभागी।
-          स्वदेश भारती
राष्ट्रीय अध्यक्ष
                                                         राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी
दिनांक – 30.10.2013
3, जिब्सन लेन,

कोलकाता – 700 069

Saturday, 21 September 2013

Swadesh Bharati: राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी, रूपाम्बरा द्वारा गंगटोक (...

Swadesh Bharati: राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी, रूपाम्बरा द्वारा गंगटोक (...: राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी, रूपाम्बरा द्वारा गंगटोक (सिक्किम) में 27-29 अक्टूबर 2013 को अंतर्राष्ट्रीय भाषा साहित्य सम्मेलन तथा संगोष्ठी विष...

राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी, रूपाम्बरा द्वारा गंगटोक (सिक्किम) में 27-29 अक्टूबर 2013 को अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन

राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी, रूपाम्बरा द्वारा गंगटोक (सिक्किम) में 27-29 अक्टूबर 2013 को अंतर्राष्ट्रीय भाषा साहित्य सम्मेलन तथा संगोष्ठी

विषय- पाद्यौगिकी राजभाषा हिन्दी का तकनीकी स्वरूप,

भारतीय एवं सार्क-साहित्य में आधुनिक संरचनात्मक विकास की प्रक्रिया तथा मानव मूल्य,

हिन्दी का अन्तर्राष्ट्रीय परिदृश्य

अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी सेमिनार एवं कवि सम्मेलन आयोजित।

विशेष सूचना के लिए ईमेल editor@rashtrabhasha.com अथवा लिखें -

प्रशासनिक कार्यालयः-
राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी, रूपाम्बरा
3, जिब्सन लेन,
कोलकाता - 700 069
टेलीफैक्स - 033-2213 5102  
(मो.) 09831155760

सम्मेलन के परिपत्र को फेसबुक ब्लॉग से प्राप्त कर सकते हैं।



International Conference on Language & Literature
Organised by Rashtriya Hindi Academy, Rupambara.

On dated 27, 28, 29 October, 2013 at Gangtok  (Sikkim) India

International Seminar on SARC Literature 

Subjects - 

Information Technology and Technical perspective of official Language Hindi and SARC Literature.

Modern trends in Indian & SARC Literature

For detail contact
Dr. Swadesh Bharati,
Chairman
Rashtriya Hindi Academy,
Rupambara
3, Gibson Lane,
Kolkata - 700 069 (India)
(Mo.) 09831155760

Wednesday, 4 September 2013

अन्तरराष्ट्रीय सार्क भाषा-साहित्य सम्मेलन गैंगटाक, सिक्किम (भारत) 27 से 29 अक्टूबर, 2013

भारत सरकार तथा सार्क देशों के मंत्रालयों विभागों निगमों, उपक्रमों आदि के राजभाषा प्रभारी, अधिकारी, प्रतिनिधि
राज्य सरकारों के प्रतिनिधि विश्वविद्यालयों के कुलपति, हिन्दी विभागाध्यक्ष
हिन्दी, भारतीय भाषाओं सार्क देशों की भाषा साहित्य के प्रचार-प्रसार में लगी स्वैच्छिक संस्थाओं के प्रतिनिधि
भारत तथा सार्क देशों के विद्वान, लेखक, पत्रकार,
भारत तथा सार्क देशों के सांस्कृतिक संस्थानों के प्रतिनिधि
भारत तथा विदेशों के सम्मानित हिन्दी विद्वान, लेखक, कवि पत्रकार आदि
सम्मेलन में सादर आमंत्रित हैं।

विस्तृत सूचना के लिए लिखे या मेल करें
सचिव,
राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी
रूपाम्बरा
3 जिब्सन लेन,
कोलकाता-700041, भारत
टेलीफैक्स- 033-22135102
ईमेल-editor@rashtrabhasha.com
व्लॉग-bswadeshblogspot.com
Mobile - 09831155760





International SARC Conference
on Language & Literature
Gangtok, Sikkim (India) 27-29 October, 2013

Officials of Govt. Ministries, Departments Culture, Education, Corporation, Puc's Etc. of Govt. of India and SARC countries.

Poets, Writers, Journalists, media persons
Cultural, Educational, Linguistic organisations supporting Language, Literature & Culture
Head of Language Deptts. of Universities of India & SARC Nations are cordially invited

For full details write/contact -
The Secretary
Rashtriya Hindi Academy
Rupambara
3 Gibson Lane,
Kolkata-700069
Telefax- 91-33-22135102
Email-editor@rashtrabhasha.com
Blog - bswadesh blogspot.com
(M) - 09831155760

Wednesday, 24 July 2013

Internation Conference on Literature, Gangtok (Sikkim), 25-27th October, 2013

Zm_m§H$Z \$m_©/Nomination Form
A§Vam©ï´>r` ^mfm-gm{hË` gå_obZ, amO^mfm àXe©Zr, {deof {hÝXr à{ejU H$m`©embm
International Conference on Language & Literature, Special Hindi Training Workshop, O.L. Exhibition
J¢JQ>mH$ ({g{¸$_) - 25 go 27 AŠQy>~a, 2013
Gangtok (Sikkim) - 25 to 27 October, 2013

1.   à{V^mJr H$m Zm_       
       Name and Designation
2.   {Zdmg H$m nVm, \$moZ Zå~a
       Residence Address, Phone No.
3.   g§ñWm Ho$ AÜ`j/à~§Y {ZXoeH$ H$m Zm_/\$moZ Zå~a
       Name of the Chairman/Managing Director of the Organisation/Phone No.
4.   g§ñWm H$m nyam Zm_ d nVm, \$moZ Zå~a
       Full Name and Address of the Organisation, Phone Number
5.   {hÝXr ^mfm gm{hË` Ho$ {bE {H$E JE H$m`© Ed§ {d{eï> CnbpãY`m§
       Work and achievements in the field of Hindi Language Literature.
6.   amO^mfm àXe©Zr Ho$ {bE {H$VZm ñWmZ Mm{hE
       Required space of Rajbhasha Exhibition?
7.   gå_obZ-àm`moOZ, Amdmgr`/H$mog© \$sg/àXe©Zr
       ñ_m[aH$m-{dkmnZ-ewëH$ H$m ~¢H$ S´>mâQ>/MoH$ H$m ã`m¡am
       Particulars of the Bank Drafts/Cheque for Sponsoring of Sammelan
       Residential course-feel/Exhibition-feel.
       Advertisement in Smarika Etc.
8.   amO^mfm n{ÌH$m-`{X erëS> nwañH$ma _| em{_b hmo aho h¢, g§{já ã`m¡am
       Short information regarding Rajbhasha Hindi-Magazine if participating in Rajbhasha Patrika Shield Award :
     (H$)    (A) n{ÌH$m H$m Zm_ (Name of the Magazine)
                   g§nmXH$ H$ Zm_ (Name of Editor)
     (I)    (B)   àH$meZ - Ad{Y (Duration of Publication)
     (J)     (C)  Hw$b n¥ð> g§»`m (Total No. of Pages)
     (K)     (D)   g§ñWm H$m Zm_ (Name of the Organisation)
     (M)     (F)  Š`m A§Vam©ï´>r` ^mfm gm{hË` gå_obZ Ho$ Adga na {deofm§H$ àH$m{eV H$a|Jo
                        (Will you Publish Special number on the ocassion of International Conference on Language & Literature).
     (N>)    (G)   df© 2012-13 Ho$ A§H$ g§b¾ H$a|  (Enclose issues published during 2012-2013)
     (O)    (H)   n{ÌH$mE§ ^oOZo H$s A§{V_ {V{W 15.08.2013 (Last Date of sending Magazine - 15.07.2013)
     Itinerary `mÌm H$m`©H«$_ …
9.   `mÌm H$m`©H«$_ {ddaU (J¢JQ>mH$ nhþ§MZo VWm dmngr H$m)
     Tour Programme (Upward / downward journey to Gangtok
10.     gwPmd/Suggestions
     à{V^mJr Ho$ hñVmja
     Signature of the participant
{XZm§H$ / Date :





amï´>r` {hÝXr AH$mX_r, ê$nmå~am
gaH$mar _mÝ`Vm àmá ñd¡pÀN>H$ amï´>r` g§ñWmZ
Ho$ÝÐr` H$m`m©b` - 331, newn{V ^Å>mMm`© amoS>, H$mobH$mVm - 700041
Rashtriya Hindi Academy, Rupambara
(Recognised Govt. Volunatary Organisation)

àemg{ZH$ H$m`m©b` … 3, {OãgZ boZ, H$mobH$mVm - 700 069, Xya^mf … 2213 5102
Administrative Office : 3, Gibson Lane, Kolkata - 700 069, Phone - 2213 5102
\¡$Šg … (033) 2213 5102, do~gmBQ> … www. rashtrabhasha.com, B_ob> … editor@rashtrabhasha.com

H«$_m§H$ … am.{h. A. 26/13/225                                                                 {XZm§H$ … 9 _B© 2013

Internation Conference on Literature,
Gangtok (Sikkim), 25-27th October, 2013
Dear Sir,
Rastriya Hindi Academy, Rupambara, are organising International Conference on Language and Literature at Gangtok (Sikkim) on  25- 27 Oct, 2013.  In which represetative of Sarc Countries and Executives, Hindi Officers of Govt of India Ministries, Undertakings, Banks, Corporations, State Govts, Foreign Missions, Voluntary Hindi Organisations, eminent poets, writers invited from all parts of the country & abroad will participate. Official Language Exhibition will also be organised very prominently and RUPAMBARA -”SMARIKA” -(Souvenir) will be published to mark the special occasion and highlight the National Integration through Indian Languages and various aspects of Official Language Implementation.
Particulars regarding publication of Advertisement in the souvenir Rupambara
   1.     Size of the souvenir - 11”x 9” column - 2
2.     Print Area - 9” x 7” (Single/Double Column)
3.     Internet Screen Area 9” x 7”
4.     Text Paper - White Maplitho and Cover-Art Board Paper (Multi colour Computerised Setting and Printing)
5.     Total Pages - about 250 to 300 Pages.
6.     Total Printed Copies - 11,200
7.     Blocks, Sterios, Art work, CD accepted.
 Tariff
A)    For Sponsoring Sammelan - Publicity through Multichannel TV., Radio,   Newspaper and Spl.Sammelan Pubicity Network will be          done.Internet, Hoarding, Banners Etc. Rs. 5,50,000/-                                     
B)  Double Fold Coloured Advertisement (Size : 22” x 9”), Art Paper - Rs.    75,000/-        
C)  Cover Page (2.3.4) Multicolour (4 Colour) on Art Paper - Rs.    50,000/-          
D)  Inside - Per page (Colour)- Rs.    28,800/-                                                                 
E)  Inside - Per page (Black / White) 25,800/-