Thursday, 1 March 2012

नंगी नाच

हलवा मिट्टी की पर्तदर पर्त तोड़ रहा
जुलाहा करघे पर टूटे धागों को जोड़ रहा
इतिहास राजपथ की भव्य काली सड़क पर दौड़ रहा

हत्या, प्रताड़ना, दुःख और क्षोभ  से उदास है किसान
विकास की सूखी लता भूख के पेड़ पर बाह बद्ध प्रियमा
पल्लिपथ पर उड़ रही धूल, सोई धरती तान, वितान
सत्ता लिखती आजादी का दैन्य-विधान

कौन है भारत भाग्य विधाता? कौन जनत्राता
कौन है सवा करोड़ भारतवासियों का रक्षक,
कौन है देश की स्वतंत्रता, अखंडता, सीमाओं का रखवाला
कौन है भारत-भाग्य विधाता

क्यों नहीं देखते जनता का शोषण-संत्रास
भूख, बीमारी, अभाव ग्रस्तता, संस्कृतियों का ह्रास
क्यों नहीं सुनते जन जन की आवाज
क्यों नहीं समझ पाते अतीत, वर्तमान और भविष्य का इतिहास
क्यों नहीं रुकता लगातार चलता नगर नाच

वसन्तोत्सव
हमारे  चारों ओर प्रकृति अपने अंग-प्रत्यंग को
नव पल्लव, किसिम किसिम के फूलों से सजा रही है
तन-उपवन में नई बहार आई है
मधु-माताल बयार आनन्दतिरेक में
नववसन्त आगमन का संदेश लाई है
चारों और मादल सुगन्ध छाई है
किन्तु आकाश में दहशत है
दिशाएं भयाक्रांत कांप रही हैं
युद्ध की विभीषिका हमारे बहुत कई आई है
इतिहास कर रहा अट्ठास
अणु बमों से लैस खड़ा है वर्तमान करने विनाश
पीला पड़ गया है, भय और आतंक से, ठहर गया है
वसन्तोत्सव का हास-विलास.....


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