Tuesday, 27 December 2011

गांधीगीरी की प्रासंगिकता

गांधीगीरी आज भी भारत ही नहीं बल्कि सारी दुनिया में प्रासंगिक है। आजादी की सुरक्षा, मानव अधिकारों का संरक्षण सत्ता की मार, पैसों से वोट की खरीद-फरोख्त, भ्रष्टाचार और काले धन की अजगरी विषाक्ता से मुक्ति पाने के लिए गांधीवाद, अहिंसा और जनजागरण तथा एकजूटता बहुत जरूरी है।
भ्रष्ट अधिकारियों, नेताओं को सबक सिखाना गांधीगीरी का सबसे पहला काम है।  गांधीवादी, अन्ना हजारे का आंदोलन, भारत की आजादी तथा राष्ट्रवाद को सुदृढ़ करने का उचित कदम है। आज के भ्रष्टाचार के फैलते हुए वायरस जो भारतीय जनमानस को हर तरह से विषाक्त बना रहा है और उसे हर कदम पर दूषित कररहाहै। आज के संदर्भ में भारतीय जनगण को अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति निःस्वार्थ भाव से देश के लिए जागरूक होना जरूरी है। चाहे सत्ता पक्ष हो या विपक्ष दोनों को राष्ट्रहित में काम करना है। अन्ना की आवाज समाज में छायी बुराई, अराजकता, सरकारी धन की लूट, नेताओं की मनमानी और भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक आंदोलन है। जिससे राष्ट्र की आजादी सुरक्षित रह सके। अब जनता को निडर होकर अपने वोट का सही इस्तेमाल करना है। अच्छे, बेदाग प्रतिनिधियों को ही चुनना है। यही देशी की स्वतंत्रता की सुरक्षा का एक ही रास्ता है।
हमें अन्ना हजारे के आंदोलन से जुड़कर राष्ट के लिए यदि बलिदान देना पड़े तो उससे बढ़कर कुछ भी नहीं। 

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