Friday, 30 December 2011

Abortion of Lokpal Bill

Its a matter of great sorrow &  surprise to see the treachery and black politics in the proceeding of Lok Sabha & Rajya Sabha on adoption of Lokpal Bill on 26th, 27th, 28th & 29th December 2011, The New Generation of India felt horrified as how the most corrupt and eaters of animal feeders ignorantly and cunningly  safeguard their own interests selfishness and corrupt party politics the govt was helpless and could not do the required leadership skills to Pass the lokpal Bill. The history of India can not forget the great treachery and injury inflicted on the body of democracy and disown the right of people. During the last more that forty years Lokpal Bill is pending and waiting. It's the voice of one Gandhian Anna Hazare by which the youth of modern India gathered to speak & think about the most corrupt Politics and the leaders selfishness in hoarding the money and Power making the Indian democracy the most corrupt and people after 65th year of Independence.
Certainly the new generation of India will give these corrupt leaders befitting reply in the next Assembling and general Elections.


लोकपाल बिल की भ्रूण हत्या 
लोकपाल बिल का संसद द्वारा पास न किया जाना भारतीय लोकतंत्र के लिए कलंक है। जो भ्रष्ट नेता जनता का पैसा ही नहीं जानवरों का चारा तक खा कर डकारते नहीं वे संसद में बड़े-बड़े भाषण देकर भारतीय जनतंत्र को बदनाम करते हुए इस देश की जनता के साथ गद्दारी करते हैं। उनकी चालाकी, भ्रष्टाचारी प्रकृति  का नजारा संसद में लोकपाल बिल पेश होने के दौरान दिखाई दिया।
सरकार 40 वर्षों से अधिक समय से लोकपाल कानून संसद द्वारा पास नहीं करा सकी। गांधीवादी अन्ना हजारे के आह्वान पर देश के लाखों युवकों ने जब भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज बुलन्द की, तब देश के भ्रष्ट नेताओं के पास लोकपाल पास करने के सिवाय कोई रास्ता नहीं बचा। फिर भी उनकी नीयत में खोट के कारण राज्यसभा में बिल पास नहीं हो सका और नेताओं के घटिया शोर शराबे की काली रात के अंधेरे में यह खो गया। 65 वर्षों की जनतांत्रिक व्यवस्था में नेताओं के भ्रष्ट, अजनतांत्रिक स्वार्थपरक, लोकाचार के कारण भारत की विशेष कर ग्रामीण जनता त्रस्त और पस्त है। नई पीढ़ी यह सब देख रही है और अगले चुनावों में भ्रष्ट नेताओं को सबक सिखाएगी।
कुछ नेता अन्ना हजारे पर वार करने से नहीं चूक रहे हैं वे कल जनतंत्र के भिखारी के रूप में जाने जाएंगे। इतिहास और जनता उनको कभी माफ नहीं करेगी। 

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