Friday, 29 December 2017

तीन तलाक

कानून से तीन तलाक बन्द हो जाएगा
लेकिन जिन्दगी के
खूबसूरत दिनों की यादों की कसक
दिल को जब कुरेदेगी तब
कानून निहायत छोटा हो जाएगा।

वैवाहिक सम्बन्धों की नाव मुहब्बत और
अटूट दोस्ती की पतवारों से चलती है।
कानून के दम पर नहीं और ना ही स्वार्थ की
सत्ता के अहले कदम पर।
                         -स्वदेश भारती

उत्तरायण
कोलकाता
30 दिसंबर, 2017


प्रेम-कई रूप
प्रेम की संकीर्णता से परे

सार्थक जीवन जीने के लिए
मैंने प्रेम के अर्थ को
कई-कई दृष्टियों से उकेरा
अलग किया मन बुद्धि से
प्रेम की संकीर्णता का मेरा तेरा
एकात्मकता के लिए
बहुत सारे यत्न किए
जब भी भग्न-प्रेम का छाया अंधेरा
एकाकी मौन-व्यथा के
विभिन्न आयाम जिए
पूरे सामर्थ्य और कर्म-निष्ठा के सहारे
रोका है आत्महन्ता अनर्थ को
व्यर्थ का संकट-बोध
हृदय कलश को आंसुओं से भरा
फटे दर्द को अपनत्त्व की सुई से सिया।

                   -स्वदेश भारती
18/1 कैम्पवेल रोड
बेंगलूर-48
17 नवम्बर, 2017

प्रेम जीवन को


सरस, सार्थक, सुन्दर, सौन्दर्य प्रिय बनाता है
किन्तु प्रेम-प्रवंचना,
विश्वासहीनता, झूठ, प्रपंच और
असहिष्णुता का आत्मघाती खेल
भरा-पूरा घर उजाड़ता है,
हृदय माटी में
हताशा, दुःख, दर्द के अंकुर उगाता है।

-स्वदेश भारती
18/1 कैम्पवेल रोड
बेंगलूर-48
18 नवम्बर, 2017

प्यार का अवदान

यह सुन्दर, प्यारी, मनोहारी धरती
सागर, नदियां, झरने, पर्वत-शिखर,
सफेद बादलों से ढकी नीली घाटियों
जंगलों, नयनाभिराम हृश्यावलियों
अनगिन रंग-विरंगे फूलों
विविध फलों से सुसज्जित
हरित भरित शस्य श्यामला
विस्तृत असीम अनन्त आकाश
सूर्य, चन्द्र, तारागण, नक्षत्र, ज्योतिर्मय
सृष्टि में विकीरित करते प्रकाश
देते मानव, चर अचर को नवजीवन
देते अस्तित्त्व-उपहार
प्रकृति का नैसर्गिक प्यार
किन्तु हम हैं कि
सिर्फ लेना जानते हैं, देना नहीं
जीवनपर्यन्त आकांक्षा का बुनते जाल
चाहते आनन्द सुख वैभव अपार
प्यार भरा संसार।

-स्वदेश भारती
18/1 कैम्पवेल रोड
बेंगलूर-48
20 नवम्बर, 2017

प्रेम-सत्य


प्रेम मन का सम्पूर्ण समर्पण है
आत्म-अनात्म-दर्पण है
प्रेम-प्रवंचना, अवहेलना
सर्जित करती हृदय में
संकुचित, निकृष्ट हीन भावना

-स्वदेश भारती
18/1 कैम्पवेल रोड
बेंगलूर-48
21 नवम्बर, 2017

प्रेम-सार

जो कुछ सृष्टि में
सुन्दर, सरस, मनोरम है
उस सब पर प्रेम का आविर्भाव है
जो समय प्रवाह के साथ मिलकर
जीवन पर्यन्त, जन्म से मृत्यु तक
हमें भीतर बाहर प्रवाहित करता
अविरल गतिमय धारा से जोड़ता
यही तो जीवन का अर्थ है
उससे विलग होना
हमारे अस्तित्त्व का अनर्थ है।

-स्वदेश भारती
18/1 कैम्पवेल रोड
बेंगलूर-48
20 नवम्बर, 2017


प्रेम आनन्द

जीवन में प्रेम आनन्द का दूसरा नाम है
प्रेम ही अनहद-नाद, अनन्त, अविराम है
प्रेम ही सचराचर सृष्टि का उदभव और विकास है
प्रेम ही ईश्वर, अल्ला, ईशा का दूसरा नाम है।

-स्वदेश भारती
18/1 कैम्पवेल रोड
बेंगलूर-48
20 नवम्बर, 2017





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