Wednesday, 15 January 2014

राष्ट्रसंघ द्वारा हिन्दी की मान्यता हेतु सहयोग की अपेक्षाएं- एक अपील!

भारत तथा विदेशों में कार्यरत हिन्दी सेवी संस्थाएं/सरकारी उपक्रमों/संस्थानों के उच्च हिन्दी अधिकारी, प्रशासक, हिन्दी सेवी, हिन्दी प्रचारक,  मीडिया, हिन्दी साहित्य प्रेमी-पाठकगण,        उदार व्यवसायीवृंद, वरिष्ठ नागरिक एवं साधारण आमजनता

मान्यवर,

        मकर संक्रांति के अवसर पर
हार्दिक शुभकामनाएं एवं अभिनन्दन

आप सभी का ध्यान वैश्विक मंच पर हिन्दी की दशा-दिशा की ओर आकर्षित कराना चाहता हूं।
आजादी के 65 साल के बाद भी अभी तक हमारी राजभाषा को राष्ट्रभाषा के रूप में राष्ट्रसंघ (यूएनओ) में मान्यता नहीं मिली। मान्यता प्रदान करने के विषय में विविध मंचों, राजभाषा सम्मेलनों, विश्व हिन्दी सम्मेलनों, ससद के कई सत्रों द्वारा बहुत सारे प्रस्तावों पर चर्चा हुई, राजनेताओं ने आश्वासन भी दिए। परन्तु अभी तक भारत सरकार द्वारा कारगर कार्रवाई नहीं हो पाई। 

राष्ट्रसंघ को जब तक सौ करोड़ रुपए हिन्दी की मान्यता के लिए अनुदान  नहीं मिल जाते, तब तक मान्यता नहीं मिल सकती।  

राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी आप सभी के सहयोग से इस काम को सफल बनाने के लिए पहल करना चाहती है। राष्ट्रीय महत्व के इस कार्य को सफल बनाने के लिए राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी ने विश्व हिन्दी भाषा निधि की स्थापना की है जिसमें आप अपने स्तर से अधिक से अधिक आर्थिक सहायता प्रदान करने की कृपा करें। जिससे 2014 में हम विश्व हिन्दी निधि के खाते में जमा हुई राशि को सरकार के माध्यम से राष्ट्रसंघ को दे सकें और हिन्दी को विश्वभाषा के रूप में राष्ट्रसंघ की भाषा स्वीकृत करा सकें। यह राष्ट्र हित में आपका प्रशंसनीय योगदान होगा।

आशा है, राष्ट्रीय अस्मिता, प्रतिष्ठा, भाषा- गौरव और राष्ट्रीयता हेतु आपका सहयोग प्राप्त होगा।

इस राष्ट्रीय कार्य हेतु कृपया अपना अनुदान सहायता राशि विश्वभाषा हिन्दी निधि के नाम राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी, केन्द्रीय प्रशासनिक कार्यालय को सीधे भेजें। जिसका पता है -

सचिव,
राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी
3 जिब्सन लेन, 
कोलकाता - 700 069, 
टेलीफैक्सः 91-33-22135102, 
 इमेल - editor@rashtrabhasha.com

आपकी सहायता राशि प्राप्त होते ही पक्की रसीद सधन्यवाद आभार सहित भेज दी जाएगी और कृत कार्रवाई की सूचना आदि से अवगत कराया जाएगा। कार्य में सफलता मिलते ही विश्वभाषा निधि खाते की आडिट रिपोर्ट भी आपकी सेवा में भेज दी जाएगी।

-निदेशक
कृते राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी

(स्वदेश भारती)
 अध्यक्ष















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