Wednesday, 8 January 2014

2014 की राजनीति

2014 भारतीय राजनीति के उथल-पुथल का समय है। 'आप' के उदय के बाद अन्य पार्टियां अंतर-चिन्तन-मंथन विवेचना के दौर से गुजर रही है, परन्तु क्या इस देश को भ्रष्टाचार, लोभलाभी, गुन्डागर्दी की राजनीति से छुटकारा मिलेगा? आम आदमी को सामाजिक न्याय, सुरक्षा और आर्थिक विकास के साथ स्वराज स्वातंत्र्य का सुख मिल सकेगा? और सत्ता के संघर्ष में महारथियों के अर्थहीन जन-लुभावन नारों से छुटकारा मिलेगा?
इन प्रश्नों के उत्तर इस देश की 120 करोड़ जनता स्वयं खोजे और सुनिश्चित मत बनाए। देश में साफ सुथरा विकासशील शासन के लिए जोरदार प्रयास करे।

समय के साथ चलना मानव अस्तित्वधर्म है। उससे चूक होना दुर्भाग्य भरा अंधकार है।

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