Thursday, 4 January 2018

माननीया श्रीमती सुषमा स्वराजजी संसद में हिन्दी को राष्ट्रसंघ की भाषा के रूप में मान्यता प्रदान कराने के विषय में जो कुछ कहा वह केवल राजनैतिक दृष्टि है। मान्यता दिलाने का संकल्प नहीं। राष्ट्रसंघ की भाषा की मान्यता के लिए सर्वप्रथम उस देश की भाषा को राष्ट्रभाषा के रूप में मान्यता प्रदान करना जरूरी है। तब राष्ट्रसंघ की भाषा के रूप में उस भाषा को मान्यता दिलाने का संकल्प करना है। माननीया, इस विषय में मैंने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदीजी, आपको तथा गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंहजी को कई पत्र, स्मरण-पत्र भेजे परन्तु अभी तक कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई। आप इस बात से अवगत होंगी ही कि किसी भी स्वतंत्र सार्वभौम राष्ट्र के चार आधार स्तम्भ होते हैं। 1. संविधान  2.  राष्ट्रध्वज  3.  राष्ट्रगान  4.  राष्ट्रभाषा।
भारत को आजाद हुए 70 वर्ष हो गए। हमें तीन आधार स्तम्भ मिले चौथा अभी तक नहीं मिला।


No comments:

Post a Comment