Saturday, 7 January 2012

वर्ष 2011 चला गया


वर्ष 2011 चला गया
निर्विकार और देता गया भाव-प्रतिभाव
हर्ष विमर्ष
छोड़ता गया अपना प्रभाव,
इस वर्ष
काव्य प्रेमियों, पाठकों के लिए मेरे दो काव्य संकलन
और एक उपन्यास प्रकाशित हुए
गिरती पत्तियों की मौन प्रतिध्वनि - काव्य संगलन (अंग्रेजी अनुवाद सहित)
Ecoing Silence of the Falling Leaves
भागता हुआ समय - काव्य संकलन
आरण्यक - उपन्यास

अब तक 32 वर्षों से लगातार डायरियां लिखता लगभग 12000 कविताएं लिख पाया और 24 कविता - संकलन तथा 8 उपन्यास कई सारे संपादित मेरा यत्न रहा है कि कुछ और अधिक लिखूं, कुछ और किन्तु दो वर्ष से असाध्य बीमारियों ने अशक्त बना दिया। किन्तु आशा और विश्वास ने जीवन के प्रति प्रबल आस्था-बल दिया और जितना भी साहित्य-कार्य ने अंधेरे में प्रकाश का काम किया। कुहासा भरे अंधकार में रास्ता सुझाया।

31.12.2011
नव वर्ष की पूर्व संध्या पर
मैं बहता हूं
विचारों के तीव्र बहाव में
शब्द-अर्थ के भाव-अभाव में
संवेदना की लहरें बारबार
हृदय-तट से टकराती 
छोड़ जातीं रेत की पर्तें दर पर्तें
बार-बार आतीं
अतीत के पाषाण- अनुबन्धों को तोड़ती
कण-कण, क्षण-प्रति क्षण
अंतर की अव्यक्त अभूर्त-कथा कह जातीं
गुंजरित करती नए नए स्वर
नव वर्ष की संध्या पर

 

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