Tuesday, 16 August 2011

15 अगस्त, 2011-दूसरी लड़ाई

64 वर्ष हो गए आजादी-दिवस मनाते,
हर पन्द्रह अगस्त को करते तिरंगे का अभिवादन
जय हिन्द, जय भारत, इंक्लाब के नारे लगाते
64 वर्ष हो गए। लाल किले से देश के नाम
देश के प्रधान मंत्रियों के सुनते संबोधन
खुशियां मनाते, करते विविध आयोजन। 
64 वर्ष हो गए ग्यारह पंचवर्षीय योजनाओं से करते
गांव, शहर के विकास, गरीबी का उन्मूलन
किन्तु विकास के नाम पर छलावा अनियोजन
64 वर्ष हो गए आजादी से भ्रष्टाचार के
शक्तिवान दानवी भ्रष्टाचारी प्रशासन
जातियों, धर्मो, वर्णों में बांटताओं का रावण
64 वर्ष हुए जनता के चुने हुए प्रतिनिधि
स्वच्छन्द, लोभलाभ के लिए करते जन-शोषण
संसद, विधान सभाओं में होता मुंड फोड़न
64 वर्ष हो गए गांव गरीबी बेरोजगारी झेलते
अशिक्षा, रोग, भुखमरी से आक्रांत जन-जीवन
हमारे आगे पीछे घूमते धृतराष्ट्र दुःशासन
64 वर्ष हो ए टूटती रही देश की अखंडता,
बढ़ती रही अराजकता, वोटखोरी के नए नए दुर्योधन
लाखों खाली पेट फुटपाथ पर सोते बिला भोजन
64 वर्ष हुए जन मानस महंगाई से त्रस्त होता रहा
भ्रष्टाचार की आग में जलते देश के आमजन
हमारी ही आजादी हमारे लिए बन गई गुलामी का कफन ।

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