Wednesday, 5 November 2014

27वां अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन एवं अंतर्राष्ट्रीय भाषा-साहित्य संगोष्ठी विशेष हिन्दी प्रशिक्षण कार्यशाला, राजभाषा प्रदर्शनी, सांस्कृतिक कार्यक्रम, गोवा दिनांक – 27 से 29 अक्टूबर 2014

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 145वीं जयंती तथा भारत की स्वतंत्रता की 68वीं वर्षगांठ के अवसर पर राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी, रूपाम्बरा द्वारा आयोजित 27वां अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन एवं अंतर्राष्ट्रीय भाषा-साहित्य संगोष्ठी का आयोजन गोवा में 27-29 अक्टूबर, 2014 को सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ।
गोवा सम्मेलन का उद्घाटन महामहिम राज्यपाल पश्चिम बंगाल, डॉ. केशरीनाथ त्रिपाठी, उत्तराखंड के महामहिम राज्यपाल, डॉ. अजीज़ कुरैशी, कर्नाटक के महामहिम राज्यपाल, श्री वी. वाजू भाई वाला एवं गोवा की महामहिम राज्यपाल श्रीमती मृदुला सिन्हा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पूष्पार्पण कर तथा पंच प्रदीप जलाकर किया।
सम्मेलन में भारत सरकार के मंत्रालयों, विभागों, उपक्रमों, निगमों आदि के वरिष्ठ अधिकारियों, राजभाषा अधिकारियों, देश के वरिष्ठ लेखकों, कवियों, भाषाविद्, विद्वानों की सहभागिता रही। इस अवसर पर 12 सरकारी विभागों, उपक्रमों, निगमों, लोकसभा को अंतर्राष्ट्रीय अकादमी राजभाषा शील्ड द्वारा सम्मानित किया गया तथा पांच साहित्यकारों, हिन्दी सेवियों को विशिष्ट हिन्दी सेवा सम्मान प्रदान किया गया।
डॉ. स्वदेश भारती, अध्यक्ष, राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी, रूपाम्बरा ने इस अवसर पर स्वागत उद्बोधन में कहा कि राष्ट्र की अस्मिता तथा राष्ट्रीय एकता, अखण्डता, नई पीढ़ी को वैचारिक भाषिक शिक्षा प्रदान करने के लिए हिन्दी की रूचि जागृत करना अत्यंत आवश्यक है। हमें भारतीय संस्कृति और उसकी मिट्टी की सुगन्ध को भूलना नहीं है। बल्कि जागतिक स्तर पर गौरव प्राप्त करना है। भारतीय भाषाओं विशेषकर हिन्दी का प्रचार-प्रसार अकादमियों, स्वैच्छिक स्वयं सेवी  हिन्दी संस्थानों के माध्यम से व्यापक रूप में सरकार को करना है।
उद्घाटन भाषण में श्रीमती मृदुला सिन्हा, महामहिम राज्यपाल गोवा ने कहा कि राष्ट्रीय एकता तथा अखंडता की भाषा है। उसका व्यापक प्रचार-प्रसार जरूरी है। हिन्दी भारतीय अस्मिता की भाषा है, इसे विश्वभाषा की दर्जा देना होगा।
कर्नाटक के महामहिम राज्यपाल श्री वी. वाजू भाई वाला ने कहा कि हिन्दी भारत के आम आदमी की भाषा है। राष्ट्रीय एकता के लिए एक ही भाषा आवश्यक है, जो हिन्दी है। एक राष्ट्रभाषा की परिकल्पना राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने की थी। जिसे हमें पूरा करना है। उत्तराखंड के महामहिम राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी ने कहा कि हिन्दी भारत में जनसंपर्क की भाषा है। जो संस्कृत के बाद भारतीय संस्कृति की संवाहिका की है। हिन्दी समूचे भारत की जोड़ने वाली भाषा है। पश्चिम बंगाल के महामहिम राज्यपाल डॉ. केशरीनाथ त्रिपाठी ने कहा कि भारत में हिन्दी बोलने वालों की संख्या 70 प्रतिशत है। 30 देशों से अधिक में पठन-पाठन होता है। हिन्दी अंतर्राष्ट्रीय भाषा के रूप में सर्वमान्य होना चाहिए। उसे विश्व भाषा और राष्ट्रसंघ की भाषा के रूप में मान्यता प्राप्त होना चाहिए। हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जहां भी जाते हैं हिन्दी में ही बोलते हैं। राष्ट्रसंघ में भी हिन्दी में ही भाषण दिया तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिन्दी में बोलते हैं।
सह सत्रों में सम्पन्न अंतर्राष्ट्रीय भाषा संगोष्ठी में भारतीय भाषाओं के विकास, संवर्धन और आदान-प्रदान की प्रक्रिया को तीव्र गति देने के लिए राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुवाद की आवश्यकता पर बल दिया गया तथा केंद्र एवं राज्यों की अकादमियों को इस दिशा में ठोस कदम उठाने का जोरदार प्रस्ताव दिया गया।
सम्मेलन में लोकसभा सचिवालय, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद, गोवा शिपयार्ड लिमिटेड, इंडियन ओवरसीज बैंक, निर्यात-आयात बैंक, कैनरा बैंक, भारतीय साधारण जीवन बीमा निगम, विशाखापटनम्, इस्पात संयंत्र, कोल इंडिया लिमिटेड, बैंक आफ बड़ौदा, पावर ग्रिड कार्पोरेशन आफ इंडिया आदि को अंतरराष्ट्रीय अकादमी राजभाषा शील्ड, राजभाषा पत्रिका शील्ड सम्मान द्वारा सम्मानित किया गया। पद्मश्री कविवर सुरेंद्र दुबे, सचिव, राजभाषा आयोग, छतीसगढ़, श्री हरिसुमन बिष्ट, सचिव हिन्दी अकादमी, दिल्ली, साहित्यकार एवं हिन्दी सेवी, प्रशासक माननीय डॉ. केशरीनाथ त्रिपाठी, श्रीमती मृदुला सिन्हा, डॉ. अजीज़ कुरैशी एवं श्री वी. वाजू भाई वाला को विशिष्ट हिन्दी सेवा सम्मान द्वारा सम्मानित किया गया। सम्मेलन स्थल पर आयोजित राजभाषा प्रदर्शनी में वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग, केंद्रीय हिन्दी निदेशालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार ने सहयोग प्रदान किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन तथा गोवा सरकार द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए, जो अत्यंत सराहनीय थे। सम्मेलन का संचालन डॉ. सुधीर शर्मा, निदेशक राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी ने किया तथा कार्य संयोजन डॉ. संजीव सक्केना, क्षेत्रीय सचिव राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी, दिल्ली एवं श्री एस. बी. प्रभुदेसाई, उपमहाप्रबंधक गोवा शिपयार्ड ने किया। दूरदर्शन, आकाशवाणी, गोवा के समाचार पत्रों, मीडिया ने व्यापक कवरेज किया। रिसोर्ट मेरिना डौराडा ने हर प्रकार की सुविधाएं प्रदान की।
सम्मेलन में गोमान्तक राष्ट्रभाषा विद्यापीठ गोवा का सहयोग प्राप्त हुआ। इस अवसर पर निम्नलिखित प्रस्ताव पारित किए गएः-

प्रस्ताव/प्रतिवेदन

1)      हिन्दी को संयुक्त राष्ट्रसंघ की आधिकारिक भाषा बनाने में केंद्र सरकार तेजी से समुचित कार्यवाही प्रारम्भ करें।
2)      संविधान में संशोधन कर हिन्दी को भारत की राष्ट्रभाषा घोषित किया जाए।
3)      हिन्दी राजभाषा के क्रियान्वयन, पारिभाषिक कोष, तकनीकी शब्दावली इत्यादि के लिए केंद्रीय हिन्दी निदेशालय, तकनीकी शब्दावली आयोग तथा प्रदेश सरकार के आयोजों के मध्य समन्वय स्थापित किया जाए।
4)      हिन्दी के अत्यंत क्लिष्ट प्रयोग के बजाय सरलीकरण, सोशल मीडिया में हिन्दी के सही प्रयोग इत्यादि पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
5)      हिन्दी के प्रचार-प्रसार में संलग्न संस्थाओं को और अधिक वित्तीय सहायता, साहित्यिक पत्रिकाओं को मदद की जाए।
6)      लोकसभा एवं राज्यसभा में हिन्दी सलाहकार समिति का गठन किया जाए। राज्यों की विधानसभा में भी सलाहकार समितियों का गठन किया जाए।
7)      गोवा में हिन्दी अकादमी की स्थापना इसी वर्ष से की जाए। गोवा को से वर्ग में लाया जाए।
8)      राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी को भारत सरकार हिन्दी के प्रचार-प्रसार, सम्मेलन-संगोष्ठी इत्यादि के लिए प्रतिवर्ष 10 लाख रुपये का अनुदान प्रदान करें।
9)      इंटरनेट एवं कम्प्यूटर में देवनागरी लिपि को प्रोत्साहित किया जाए तथा हिन्दी के लिए रोमन लिपि के प्रयोग पर रोक लगाई जाए।
10)   अकादमी का अगला सम्मेलन छत्तीसगढ़ में आयोजित करने तथा इस हेतु पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे को संयोजक बनाने का भी निर्णय लिया गया।
11)   अनुवाद के लिए एक सशक्त संस्था बनाई जाए। भारतीय अनुवाद परिषद को उन्नत किया जाए।
12)   राज्यों की हिन्दी अकादमियों का एक संयुक्त सम्मेलन राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी, रूपाम्बरा के सहयोग से किया जाए।
13)   केंद्र एवं राज्य सरकार के प्रतिष्ठानों में गोपनीय रिपोर्ट/वार्षिक-प्रतिवेदनों में हिन्दी के लिए विशिष्ट कार्य कर रहे अधिकारियों/कर्मचारियों को महत्व देने के लिए विशिष्ट उल्लेख किया जाए तथा प्रपत्रों में एक कॉलम अतिरिक्त बनाया जाए।
                                       
(डॉ. स्वदेश भारती           (डॉ. सुधीर शर्मा)
  राष्ट्रीय अध्यक्ष               निदेशक




1 comment:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 6-11-2014 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1789 में दिया गया है
    आभार

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