Tuesday, 27 September 2016

                                     संयुक्त राष्ट्र संघ में हिन्दी को मान्यता

माननीय प्रधानमंत्री जी ने लोकसभा चुनाव के समय सारे देश में घूम-घूम कर जनता के
सामने अपनी बातें हिन्दी में रखीं। वे विजयी हुए। भारत की बागडोर थामी, हिन्दी
को माध्यम बनाकर। परन्तु अभी तक हिन्दी को राष्ट्रसंघ की भाषा बनाने के लिए
सार्थक कदम नहीं उठाया गया। इसके लिये राष्ट्रसंघ को लगभग 200 करोड़ रुपये देने
तथा 172 देशों का समर्थन प्राप्त करने के लिए कारगर कार्रवाई नहीं हुई। राष्ट्रीय हिन्दी
अकादमी की ओर से कई बार माननीय प्रधानमंत्री तथा अन्य वरिष्ठ नेताओं से अनुरोध
किया गया कि वे हिन्दी को विश्वभाषा बनाने के लिए सघन प्रयास करें जो राष्ट्र के गौरव
एवं अस्मिता का प्रश्न है। परन्तु सारी चेष्टाएं व्यर्थ हो गई।

अब माननीय श्री नरेन्द्र भाई मोदी भारत के प्रधानमंत्री देश के सर्वांगीण विकास और
प्रगति के लिए समर्पित भाव से काम कर रहे हैं। उनसे सादर प्रार्थना है कि जब वे
राष्ट्रसंघ महासभा में अपनी बात हिन्दी में रखें तो साथ-साथ विश्वभाषा हिन्दी को
राष्ट्रसंघ की भाषा बनाने की घोषणा करें तथा आवश्यक कोश आबंटित करें।

भारत के स्वात्र्योतर इतिहास में माननीय प्रधानमंत्री जी का यह उल्लेखनीय एवं
ऐतिहासिक कार्य होगा। जो देश तथा विदेश के सभी भारतीयों को गर्वित करेगा और
अंतर्राष्ट्रीय धरातल पर राष्ट्रभाषा हिन्दी को विश्वभाषा के रूप में मान्यता प्राप्त होगी।

डा. स्वदेश भारती, अध्यक्ष
राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी
331, पशुपति भट्टाचार्य रोड
कोलकाता-700 041
(मो.) 09903635210

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